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Monday, November 26, 2018

अच्छाई का एहसास | Realisation of goodness

मनोज एक सम्पन्न परिवार का लड़का था | उसके पिता एक बड़े व्यापारी थे | उनकी गिनती शहर के रईसों में होती थी | मनोज ने इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त कर ली थी | उसकी रुचि नौकरी करने में थी | मनोज को एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी में अच्छे वेतन पर इंजीनियर की नौकरी मिल गई थी | घर में रुपए पैसे की कोई कमी नहीं थी | परिवार के सभी सदस्यों  ने यह निर्णय लिया कि मनोज की शादी किसी घरेलू कन्या से ही कर दी जाए | मनोज को भी यही उचित लग रहा था |

manoj


परिवार वालों ने शहर के एक प्रतिष्ठित परिवार की लड़की  रेनू से मनोज की शादी तय कर दी | जल्द ही उन दोनों का विवाह भी संपन्न हो गया | रेनू बहुत ही सुंदर और हंसमुख स्वभाव की लड़की थी | वह भी एक संपन्न परिवार की लड़की थी लेकिन फिर भी बहुत सादगी से रहती थी | सादगी में भी वह बहुत सुंदर और प्रभावशाली व्यक्तित्व की लड़की लगती थी | अपने अच्छे स्वभाव के कारण उसने जल्द ही परिवार के सभी सदस्यों का दिल जीत लिया | खाना बनाने में वह निपुण थी | वह रोज नए-नए और स्वादिष्ट पकवान बनाती थी | उसने घर के सारे काम की जिम्मेदारी संभाल ली थी | रेनू मनोज की हर छोटी बड़ी जरूरत का खास ख्याल रखती थी | परिवार के सभी सदस्य अपनी प्रत्येक जरूरत के लिए अब रेनू पर निर्भर करते थे |




मनोज को लगता था कि उसकी पत्नी रेनू उसके दोस्तों की पत्नियों की तरह आधुनिक नारी नहीं लगती | वह सोचता था कि रेनू घर के  जिन कामों में व्यस्त रहती है वह काम तो एक नौकरानी भी बहुत अच्छी तरह कर सकती है | वह रेनू को अपने साथ बाहर भी लेकर नहीं जाता था क्योंकि उसे रेनू को साथ लेकर जाने में शर्म महसूस होती थी | | उसका व्यवहार भी रेनू के प्रति अच्छा नहीं था | जबकि रेनू मनोज की खुशी के लिए अपने आप को बदलने की पूरी कोशिश कर रही थी | मनोज ने मन ही मन रेनू को तलाक देने का निर्णय कर लिया था | लेकिन अपने परिवार के सदस्यों को नहीं बताया था क्योंकि उसे मालूम था कि उसे सभी के विरोध का सामना करना पड़ेगा |


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       पढ़िए : एक अच्छी सोच

तभी अचानक शहर में डेंगू के बुखार का प्रकोप फ़ैल गया | मनोज भी  बुखार की चपेट में आ गया | तेज बुखार के कारण मनोज बेहोश हो गया था | जब उसको होश आया तो उसे पता चला कि रेनू सारी रात उसके सिरहाने बैठकर उसके माथे पर ठंडे पानी की पट्टियां करती रही थी | मां ने रेनू को थोड़ा आराम करने की सलाह दी लेकिन वह नहीं मानी और मनोज की देख भाल में लगी रही | रेनू की देखभाल के कारण वह तेजी से ठीक होने लगा |


 मनोज ने समय बिताने के लिए अपने  एक दोस्त को फोन किया तो पता चला कि वह दोस्त भी बीमार है लेकिन उसकी पत्नी  बाजार में शॉपिंग करने गई हुई है | दूसरे दोस्त को फोन करने पर पता चला कि वह भी तीन दिन से बीमार है लेकिन उसकी पत्नी उसे इस हाल में छोड़कर  ब्यूटी पार्लर गयी हुई है | अपने दोस्तों की पत्नियों की आधुनिकता से प्रभावित मनोज को अब अपनी पत्नी रेनू ही सबसे अच्छी  लगने लगी थी | उसे अपनी गलती का एहसास हो चुका था | मनोज ने सामने बैठी हुई रेनू को ध्यान से देखा, अब उसे रेनू की सादगी में ही सुंदरता का एहसास हो रहा था  | रेनू जैसी अच्छी जीवन साथी मिलने पर अब वह अपने आप को खुशकिस्मत महसूस कर रहा था |

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