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Friday, November 16, 2018

एक अच्छी सोच | A good thinking

शेखर अपने परिवार के साथ शहर में रहता था | उसके परिवार में पत्नी रेखा के अलावा एक बेटी और एक बेटा थे | पिछले कुछ दिनों से उनके घर में दिवाली के नाम पर विशेष सफाई अभियान चल रहा था | पत्नी रेखा घर की सफाई में विशेष रुचि ले रही थी | बच्चे भी दिवाली आने की खुशी में उत्साहित हो रहे थे | दिवाली पर खरीदी जाने वाली चीजों की सूची कई दिनों से बन रही थी |



इस सूची में बच्चों के बम पटाखे और मिठाइयों से लेकर दिवाली की संध्या के लिए लक्ष्मी पूजन की सामग्री और रिश्तेदारों को दिए जाने वाले मिठाइयां और गिफ्ट सभी को शामिल किया गया था | घर में काम करने वाले नौकरों को देने के लिए मिठाई को भी सूची में शामिल किया गया था | घर में रोशनी करने के लिए मोमबत्ती और बल्बों की लड़ी खरीदने का भी विचार किया गया था | बल्बों की लड़ियों से सजावट भी अच्छी होती है और तीन-चार दिन तक घर में रोशनी भी की जा सकती है |
दिवाली से तीन दिन पहले शेखर खरीदारी की सूची लेकर बाजार में गया था | लगभग दो घंटे से ज्यादा समय लगाकर वह सभी चीजें खरीद लाया था | रेखा खरीद कर लाई गई चीजों का सूची से मिलान करके उन्हें संभाल रही थी | मिठाईयां, पटाखे, पूजा की सामग्री, बल्बों की लड़ियां इत्यादि सब कुछ आ गया था | खरीदकर लाये गए सामान में  इनके अलावा एक बड़ा सा पॉलीथिन भी था | रेखा ने देखा उसमें ढेर सारे मिट्टी के दीपक थे | इतने सारे दीपक देखकर रेखा को पति पर  गुस्सा आ गया | उसे लगा कि शायद दीपक सस्ते मिल रहे होंगे इसलिए शेखर इतने ज्यादा दीपक खरीद लाया |

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इन्हें कुछ देर के लिए पहले पानी में डालना पड़ेगा फिर इनको पानी से निकालकर सुखाना पड़ेगा फिर इसमें तेल और बाती डालने के बाद ही इन्हें जलाया जा सकता है | यह एक मेहनत और झंझट वाला काम है | रेखा ने पति से गुस्से में कहा "क्या ज्यादा दीपक जलाने से घर में ज्यादा लक्ष्मी आ जाएगी क्या" ? शेखर ने बताया कि एक गरीब बच्चा मिटटी के दीपक बेच रहा था | लेकिन उससे कोई भी दीपक खरीद नहीं रहा था | उसके स्थान पर लोग मोमबत्तियां और बल्बों की लड़ियाँ खरीद रहे थे | मैंने यह सोच कर दीपक खरीद लिए कि इन पैसों से उसके घर पर भी दिवाली मनाई जा सकेगी | उसके घर में भी दो दीपक जल सकेंगे और वह मिठाई का एक टुकड़ा खा सकेगा | यह सुनने के बाद रेखा को अपने पति के सोचने का नजरिया महान लगने लगा | वह अब बड़े प्यार से उन मिटटी के दीपकों  को संभालने लगी | इन मिट्टी के दीपकों से रेखा के घर के अलावा उस गरीब दुकानदार के घर में भी उजाला होने वाला था |

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