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Sunday, November 11, 2018

Beethoven's biography in Hindi | विश्व प्रसिद्ध संगीतकार बीथोवन जो कि स्वयं सुन ही नहीं सकता था

बीथोवन को बचपन से ही संगीत में गहरी रुचि थी | वह  पियानो बहुत अच्छा बजाते थे | जब वह पियानो बजाते थे तो उनकी मधुर धुन को सुनकर आने जाने वाले लोग रुक कर बड़े ध्यान से सुनते थे | उनके पिता नशा करने के आदी थे | वह अपने पुत्र के संगीत के जरिए पैसा कमाना चाहते थे जिससे की वह अपना नशा करने का शौक पूरा कर सकें |

Beethoven biography


बीथोवन की मां एक अच्छे स्वभाव की स्त्री थी | वह अपने पुत्र से बहुत प्रेम और स्नेह करती थी | उसका संगीत का शौक पूरा करने के लिए मदद करती थी | जब बीथोवन मात्र 17 वर्ष की आयु के थे तभी उनकी माता का आकस्मिक निधन हो गया | महान संगीतकार मोजार्ट और हेडन  से बीथोवन ने संगीत की शिक्षा ली | बीथोवन अक्खड़ स्वभाव के बन गए थे |

Beethoven childhood photograph


जब वह 30 वर्ष की आयु के हुए तब उन्हें कानों से सुनने में कुछ परेशानी महसूस होने लगी | उन्होंने कई डॉक्टरों से अपने कानों का उपचार करवाया लेकिन उनके सुनने की शक्ति धीरे-धीरे कम होती चली गई और अंत में वह बहरे हो गए | एक संगीतकार के लिए इससे दुखद स्थिति क्या हो सकती थी | उन्होंने इस स्थिति को चुनौती के तौर पर स्वीकार किया |  इस बहरेपन ने उसके जीवन को ही बदल दिया | उन्होंने कई ऐसी शानदार और कर्णप्रिय संगीत की धुनों की रचना की जो कि हमेशा के लिए अमर हो गई | जबकि वह स्वयं इन धुनों को सुनने में असमर्थ थे |

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बीथोवन संगीत के कार्यक्रम प्रस्तुत करते रहते थे, जिन्हें की श्रोताओं द्वारा सराहा  जाता था | ऐसे ही एक दिन वह संगीत का एक कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे थे | वह अपने साथी कलाकारों को संगीत का निर्देशन कर रहे थे इसलिए दर्शकों की ओर उनकी पीठ थी | दर्शक उनके बेहतरीन संगीत की धुनों पर झूम रहे थे | कार्यक्रम समाप्त होने पर बीथोवन अपना सामान इकट्ठा करने लगे | अभी भी दर्शकों की ओर उनकी पीठ ही थी | तभी उनके एक  साथी कलाकार ने उनका चेहरा दर्शकों की ओर घुमा दिया | दर्शक बीथोवन के सम्मान में खड़े होकर तालियां बजा रहे थे | जब दर्शकों को इस बात का ज्ञान हुआ कि बीथोवन न तो अपनी बनाई धुनों को सुन सकते हैं और न ही उनके सम्मान में बजाई गई तालियों को तो उनकी आंखें भर आई | इस संगीतकार की महानता के सामने दर्शक नतमस्तक हो गए | साहित्य में जितना सर्वोच्च स्थान शेक्सपियर का है पश्चिमी संगीत में  उतना ही सर्वोच्च स्थान बीथोवन का है |

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