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Tuesday, October 2, 2018

आपसी समझ और भरोसा | Trust and mutual understanding is key to happiness

एक  विद्वान संत महात्मा थे | उनका सत्संग सुनने के लिए दूर-दूर से लोग आते थे | सत्संग के बाद वह अपनी कुटिया में अपने शिष्यों और श्रद्धालुओं के साथ धार्मिक चर्चा भी करते थे | भक्त उनसे अपना किसी भी तरह का संशय या पारिवारिक समस्याओं का हल पूछते थे | संत महात्मा अपने ज्ञान और तर्कसंगत जवाब से उनके संशय और समस्याओं का निराकरण कर देते थे |
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ऐसे ही चर्चा में एक दिन एक श्रद्धालु ने पूछा मैं एक गृहस्थ व्यक्ति हूं | मेरा अपने परिवार के सदस्यों से वैचारिक मतभेद रहता है | इस कारण घर का वातावरण तनावपूर्ण रहता है | घर के वातावरण को सौहार्दपूर्ण और सुख शांति वाला  बनाने का उपाय बताइये | संत कुछ देर शांत रहे फिर उन्होंने अपनी पत्नी को आवाज देकर कहा " एक मोमबत्ती जलाकर दे जाओ " | संत की पत्नी मोमबत्ती जलाकर दे गयी | वह व्यक्ति आश्चर्य के भाव से संत की ओर देखता है क्योंकि दोपहर का समय होने के कारण कुटिया में पर्याप्त प्रकाश था | फिर संत महात्मा ने मोमबत्ती क्यों मंगवाई | थोड़ी देर के बाद संत महात्मा ने पत्नी को फिर आवाज लगाकर कहा "थोड़े सेब काटकर दे जाना" | इस बार उनकी पत्नी सेब के स्थान पर खीरे और टमाटर काटकर दे गयी |


वह व्यक्ति सोचता है कि संत महात्मा के तो अपने घर का ही वातावरण ठीक नहीं है | दिन के पूरे प्रकाश में मोमबत्ती जलाते हैं और सेब मांगने पर खीरे टमाटर आते हैं | वह व्यक्ति यह सब देखकर संत महात्मा से जाने की आज्ञा मांगता  है | संत महात्मा उससे कहते हैं कि आपको अपनी पारिवारिक समस्या का समाधान मिल गया होगा | वह व्यक्ति कहता है आपने तो अभी तक मुझे कोई भी समाधान बताया ही नहीं है |

       पढ़िए :  सम्मान की रक्षा



तब संत ने कहा मैंने जब मोमबत्ती मंगवाई तो मेरी पत्नी को भी दिखाई दे रहा था कि कुटिया में दोपहर का समय होने के कारण पर्याप्त प्रकाश है | उसने यह सोच कर कि मोमबत्ती मंगवाई है तो कोई विशेष काम  ही होगा इसलिए वह बिना कुछ कहे मोमबत्ती देकर चली गयी | इसी प्रकार सेब मांगने पर वह खीरे और टमाटर देकर चली गई | संभव है कि उस समय घर में सेब उपलब्ध ही न हों | यह सोच कर मैं चुप रहा | आपसी समझ होने के कारण अनावश्यक बहस नहीं की | इसलिए किसी भी प्रकार का तनाव उत्पन्न नहीं हुआ |


पति-पत्नी को आपसी समझ बूझ से एक-दूसरे के अवगुण के स्थान पर गुण देखने चाहिए |  पति-पत्नी को अनावश्यक वाद-विवाद  करके माहौल बिगाड़ने से बचना चाहिए | क्रोध और अहंकार से बचना चाहिए | पति-पत्नी को एक दूसरे की  भावनाओं को समझते हुए एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए | उस व्यक्ति को अब समझ आ गया था कि आपसी समझ की कमी  के कारण ही उसका गृहस्थ जीवन तनावग्रस्त है | गृहस्थ जीवन आपसी समझ और विश्वास से ही खुशहाल बनता है | यही एक सफल और आदर्श गृहस्थ जीवन का मूल मंत्र है |


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