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Wednesday, October 10, 2018

आम की गुठली ने किया मालामाल | One mango worths million

एक बुजुर्ग व्यक्ति था | वह अत्यंत गरीब था | किसी तरह उसका जीवन निर्वाह हो रहा था | उसके दो पुत्र थे | दोनों पुत्र भी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ उसी घर में रहते थे |  छोटे पुत्र का पिता से अधिक प्रेम था | छोटा पुत्र ही पिता की  देखभाल करता था |
old man on death bed


जब बुजुर्ग व्यक्ति का अंतिम समय आया तो उसकी इच्छा अपने दोनों बेटों को कुछ आशीर्वाद के रूप देने की हुई | उसके पास केवल एक आम ही पड़ा हुआ था | उसने वही आम अपने दोनों बेटों को आशीर्वाद के रूप में दे दिया | कुछ समय के बाद उस बुजुर्ग व्यक्ति की मृत्यु हो गई | अगले दिन बड़े भाई ने अकेले ही आम खा लिया और छोटे भाई के हाथ में आम की गुठली देते हुए कहा "तुम्हारे  लिए यही पिताजी का आशीर्वाद है" | छोटे भाई ने यह सोचकर कि पिता जी ने बहुत प्यार और आशीर्वाद के साथ यह आम दिया था, उस आम की गुठली  को पूरी श्रद्धा के साथ अपने माथे पर लगा लिया |

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छोटे भाई ने आंगन में मिट्टी खोदकर उस गुठली को उगाने के विचार से लगा दिया और पानी भी दे दिया | कुछ ही दिनों बाद आम के पौधे के पत्ते निकलने शुरू हो गए थे | धीरे-धीरे आम का पौधा बढ़ने  लग गया | कुछ बरस के बाद आम का वह पौधा भरा-पूरा पेड़ बन गया था | आम के पेड़ के कारण आंगन हरा-भरा दिखता था | घने फैले हुए पेड़ के कारण दोपहर के समय भी आंगन में छाया ही रहती थी | बच्चों ने पेड़ पर एक झूला भी बांध दिया था जिस पर झूलकर वह  बहुत खुश होते थे |
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mango tree

मौसम आने पर पेड़ पर आम के बहुत से फल भी लग गए | सारे परिवार ने भरपूर आम खाए | कच्चे आम का अचार और चटनी भी बना ली | आम के पेड़ की लकड़ी हवन में प्रयोग करने के लिए लोग खरीद कर ले जाते थे | आम के पेड़ के पत्ते भी घर की सजावट करने के उद्देश्य से लोग खरीदकर ले जाते थे | इस प्रकार छोटे भाई का नियमित रूप से अतिरिक्त आय का एक जरिया बन गया था | बड़े बेटे को आम से केवल कुछ पलों का ही सुख मिला जब कि छोटे बेटे को पिता के आशीर्वाद के रूप में सदा के लिए सुख मिल गया था | यहां पर अंतर केवल दोनों भाइयों की सोच का ही था | छोटे भाई की सकारात्मक सोच ने पिता की आशीर्वाद की भावना को साकार रूप दे दिया था |

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