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Sunday, October 14, 2018

जिंदगी में सताने वाले भी अपने थे दफनाने वाले भी अपने थे |

अशोक जी का एक छोटा सा खुशहाल परिवार था | वह एक सरकारी अधिकारी थे | उनकी पत्नी गीता भी एक सरकारी कार्यालय में नौकरी करती थी | वरुण उनका इकलौता पुत्र था | वह एक इंजीनियर बन गया था | उसकी एक अच्छी सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी भी लग गई थी |


house decorated for marriage

अशोक जी ने पुत्र के विवाह के लिए योग्य कन्या की तलाश शुरू कर दी थी | जल्द ही उन्हें एक अच्छी लड़की मिल गई थी | एक महीने बाद की शादी की तिथि भी निश्चित कर दी गई थी | शादी की तैयारिओं  में समय तेजी से बीत गया | शादी के कार्ड बाँटे जा चुके थे | शादी की सभी खरीदारी भी  हो चुकी थी |अब शादी में केवल तीन दिन शेष रह गए थे | पहले दिन शगुन की रसम होनी थी | दूसरे दिन मेहंदी की रस्म होनी थी और तीसरे दिन शादी होनी थी |


आज सुबह से ही वरुण कहीं पर भी दिखाई नहीं दे रहा था | महेश जी ने पत्नी से उसके बारे में पूछा | उसको भी वरुण के बाहर जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी | वरुण को फोन करने की कोशिश की तो उसका फोन बंद था | थोड़ी देर बाद महेश जी को अपने फोन पर वरुण का एक मैसेज आया | | वरुण ने लिखा था कि "आज मैं अपनी पसंद की लड़की से शादी कर रहा हूँ" | यह संदेश पढ़ते ही महेश जी के ऊपर जैसे बिजली गिर पड़ी थी | उन्होंने ऐसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की थी | वह  परेशानी के सागर में डूब गए | उन्होंने पत्नी को भी  वरुण का मैसेज दिखाया |


angry old man

रिश्तेदारों और समाज में बेइज्जती और शर्मिंदगी के हालात बन चुके थे | गीता ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए अपने कुछ नजदीकी रिश्तेदारों और लड़की वालों को फोन करके तत्काल बुला लिया | कुछ  बहस और गरमा-गरमी  के बाद महेश जी के बार-बार  हाथ जोड़कर माफ़ी मांगने पर लड़की वाले दुखी मन से हालात से  समझौता करते हुए शांत होकर चले गए | बेटे के कारण हुई शर्मिंदगी ने महेश जी को अंदर तक तोड़ दिया था | उन्होंने बेटे से अपने संबंध हमेशा के लिए तोड़ लिए |


burning dead body



कुछ समय के बाद महेश जी रिटायर हो गए | अब तनाव के कारण उनकी सेहत तेजी से गिरनी शुरू हो गई थी | वरुण ने कई बार माता-पिता से मिलने का प्रयास किया लेकिन महेश जी ने हर बार उससे मिलने से सख्ती के साथ इंकार कर दिया | लगभग एक बरस के बाद ही उनकी मृत्यु हो गई | पिता की मृत्यु की खबर सुनकर वरुण भी अपनी पत्नी के साथ आ गया था | वरुण ने महेश को कभी न खत्म होने वाला दर्द दिया था |  रिश्तेदारों के समझाने और दबाव देने पर गीता ने वरुण को घर वापस आने की भीगी हुई पलकों से अनुमति दे दी थी | वह समझ नहीं पा रही थी उसके पति का लिया गया फैसला ठीक था या उसने जो फैसला लिया वह ठीक था | माता पिता धरती पर भगवान का ही स्वरूप हैं | बच्चों को उनका और उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए |

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