Breaking

Tuesday, October 2, 2018

मसीहा की मौत | Blessing in disguise

indian king hunting in forest shikar

एक राजा था | वह अपने साथियों और सुरक्षा सैनिकों के साथ जंगल में शिकार खेलने के लिए गया | एक शिकार का पीछा करते-करते घोड़े पर सवार राजा अपने साथियों से अलग होकर बिछड़ गया | अकेले जंगल में भटकते हुए राजा को बहुत समय हो गया था | वह प्यास से बेचैन हो चुका था | राजा का प्यास के कारण गला सूख रहा था | उसने घने जंगल में पानी की बहुत  तलाश की लेकिन उसे पानी कहीं नहीं मिला | अचानक राजा की नजर एक पेड़ पर पड़ी जहां एक ऊँची टहनी से एक-एक बूंद करके पानी टपक रहा था |प्यास से निढाल राजा को यह देखकर बड़ी राहत मिली |

       पढ़िए :  आपसी समझ और भरोसा

water droplets from tree


 अब राजा ने उस एक-एक बूँद टपकते हुए पानी को इकट्ठा करने के लिए किसी बर्तन की तलाश में चारों तरफ नजर घुमाई | राजा को उस जगह के आस-पास  ऐसा  कोई बर्तन नहीं मिला | अंत में राजा ने पेड़ों के नीचे गिरे हुए पत्तों से एक दोना बनाया और पेड़ से एक-एक बूंद टपकते हुए पानी को उस दोने में इकट्ठा करने लगा | थोड़ी ही देर में वह छोटा सा दोना पानी से भर गया | राजा उस एक-एक बूँद इकट्ठा किए हुए पानी को पीने के लिए जैसे ही दोने को अपने मुंह के पास लेकर गया तभी अचानक एक बंदर ने उस पानी से भरे दोने पर झपट्टा मार कर उसे नीचे गिरा दिया | एक-एक बूंद इकट्ठा किए हुए पानी को बंदर द्वारा गिरा दिए जाने पर राजा को बहुत निराशा हुई | लेकिन दोबारा कोशिश करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था | इसलिए राजा एक बार फिर उस बूँद-बूँद टपकते हुए पानी को दोने में इकट्ठा करने लगा |

       पढ़िए :  सम्मान की रक्षा

notorious monkey


 पेड़ से पानी बहुत आहिस्ता-आहिस्ता एक-एक बूंद करके टपक रहा था इसलिए राजा पानी इकट्ठा करते-करते थक गया था | थोड़ी देर में  में एक बार फिर वह छोटा सा दोना पानी से भर गया | पेड़ से पानी बहुत आहिस्ता-आहिस्ता एक-एक बूंद करके टपक रहा था इसलिए राजा पानी इकट्ठा करते-करते थक गया था | थोड़ी देर में  में एक बार फिर वह छोटा सा दोना पानी से भर गया | राजा एक बार फिर जैसे ही पानी पीने के लिए दोने को अपने मुंह के नजदीक लाया, बंदर ने बिजली की तेजी के साथ झपट्टा मार कर दोने  को  फिर से जमीन पर गिरा दिया | अब राजा को इस शैतान बंदर पर बहुत गुस्सा आया |
अब राजा ने कुछ सोच कर एक हाथ में तलवार पकड़ ली और दूसरे हाथ से दोने में पानी भरने लगा | थोड़ी देर में एक बार फिर दोने में पानी भर गया | इस बार राजा पूरी तरह से सावधान था | राजा ने पानी पीने के लिए दोना जैसे ही एक बार फिर अपने मुंह की तरफ बढ़ाया बंदर ने फिर दोने पर छलांग लगाकर गिरा दिया | क्रोधवश राजा ने भी तलवार से उसके ऊपर वार किया और बंदर जख्मी हो गया |


अब तक राजा भी पानी भरता-भरता थक चुका था | राजा प्यास से बेहाल हो चुका था इसलिए राजा ने सोचा कि इस पेड़ के ऊपर चढ़कर जहां से पानी टपक रहा है सीधा वहीं से पानी पीकर अपनी प्यास बुझाना ही बेहतर रहेगा | यह सोचकर राजा जैसे ही पेड़ पर थोड़ा ऊपर चढ़ा तो राजा की आंखें हैरानी से फटी रह गई | पेड़ के ऊपर एक बड़ा सा अजगर सो रहा था और उसके मुंह से लार टपक रही थी | जिसे राजा पानी समझकर पीने वाला था | इसे पीकर राजा का मरना निश्चित था |

 उस बंदर ने राजा के प्राणों की तीन बार रक्षा की थी | राजा ने देखा कि बंदर जख्मी होकर गिरा पड़ा है | अब राजा को बंदर पर क्रोध करने का पश्चाताप होने लगा |  आज उसे सबक मिल गया था कि क्रोध के कारण किसी भी जीव के प्रति हिंसक नहीं होना चाहिए |

No comments:

Post a Comment