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Wednesday, October 17, 2018

एक कद्दू का तीर्थ स्नान | ablution of a pumpkin

एक संत थे वह धार्मिक अंध-विश्वासों और आडंबरों में बिलकुल भी विश्वास नहीं रखते थे | वह अपने भक्तों के अज्ञानता के अंधकार को दूर करने का भरसक प्रयास करते थे | वह उन्हें ज्ञान का उजाला फैलाने वाले और सकारात्मक सोच वाले प्रवचन सुनाते थे | दूर-दूर से शिष्य संत जी  के प्रवचन सुनने के लिए उनके आश्रम में आते थे |

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pumpkin animated image


 एक बार उनके शिष्यों ने धार्मिक यात्रा पर जाने का कार्यक्रम बनाया | तीन-चार दिन का कार्यक्रम बनाया गया था | एक ही रूट के कुछ धार्मिक स्थानों के दर्शन करने और धार्मिक स्थानों के पवित्र जल से स्नान करके आने का कार्यक्रम बनाया गया था | उन्होंने संत जी को भी साथ में जाने के लिए आमंत्रित किया | संत जी ने कहा “मैं तो आपके साथ तीर्थ यात्रा पर जाने में असमर्थ हूं लेकिन आप मेरे स्थान पर इस कद्दू को अपने साथ ले जाए | जिस-जिस धार्मिक स्थान पर आप पवित्र जल से स्नान करें इस कद्दू को भी उसी जल से स्नान करा दीजिएगा” |


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संत ने यह कहते हुए एक बड़ा सा कड़वा कद्दू तीर्थ यात्रा पर जाने वाले शिष्यों को दे दिया | शिष्यों ने भी गुरु के कहे हुए शब्दों का भावार्थ न समझते हुए उस कद्दू को अपने साथ तीर्थ स्नान करवाने के लिए ले लिया | शिष्यों का दल तीर्थ यात्रा के लिए चला गया | अब जहां-जहां पर शिष्य धार्मिक स्थल पर पवित्र जल से स्नान करते थे वहां पर कद्दू को भी स्नान करवा देते थे | इस प्रकार शिष्य अपने गुरु के आदेश का पालन कर रहे थे | शिष्य पवित्र जल में बार-बार श्रद्धा भाव से डुबकी  लगाते थे | कद्दू को भी उतनी  ही बार पवित्र जल में श्रद्धा भाव से डुबकी  लगवा देते थे |


तीन-चार दिन के बाद शिष्य और वह कद्दू  निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तीर्थ यात्रा करके वापस संत जी के आश्रम में आ गए | संत जी ने यात्रियों के भोजन की व्यवस्था की हुई थी | शिष्यों ने आकर कद्दू संत जी को दे दिया| संत जी ने हलवाइयों  से कह कर उस कद्दू की विशेष रूप से  सब्जी बनवा दी थी | भोजन बनने के बाद सभी शिष्यों  के लिए परोस दिया गया था |




 भोजन करते हुए सभी शिष्यों ने पूरी, छोले, हलवे आदि पकवानों की प्रशंसा की लेकिन उन्हें कद्दू की सब्जी कड़वी लगी | शिष्यों ने संत जी को बताया "कद्दू की सब्जी तो कड़वी है" | संत जी ने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा "यह सब्जी तो उसी कद्दू से बनी हुई है जो तीर्थ स्थान करके आया है | यह कद्दू तीर्थ स्नान पर जाने से  पहले भी कड़वा था और इतने तीर्थ स्थानों के पवित्र जल से स्नान करने के  बाद भी यह कड़वा ही है" | सभी शिष्यों को अब संत जी के मन का भाव समझ आ गया था | उन्हें समझ आ गया था कि तीर्थ स्नान करके केवल तन साफ नहीं करना होता बल्कि मन भी साफ करना होता है | 

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