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Friday, May 4, 2018

अपने तो अपने होते हैं | Always take care of your loved ones


       शर्मा जी के घर पर शादी का माहौल था | शर्मा जी के बेटे राकेश की शादी होने में केवल तीन दिन ही  रह गए थे | सभी रिश्तेदारों और परिचितों को शादी का निमंत्रण पत्र  भेज दिया गया था | कई दिन पहले ही रिश्तेदारों, परिचितों और मित्रों को जिन्हें आमंत्रित करना था उनकी सूची बना ली गई थी | केवल एक नाम पर ही विचार नहीं किया गया था और वह नाम था रजनी बुआ  का |

brother and sister celebrating rakshabandhan
       शर्मा जी और उनकी बहन की उम्र लगभग लगभग एक  सामान ही थी | बचपन से ही बहन भाई में बहुत प्यार था | ऐसा कोई दिन नहीं जाता था जब उनकी टेलीफोन पर आपस में बातचीत न हो | दोनों  एक दूसरे के परिवार  में  खुशी के हर  मौके पर जरूर उपस्थित होते थे | सभी  बहन भाई के इस प्यार और आपसी समझ का उदाहरण देते थे |
        लगभग 6 साल पहले शादी के एक अवसर पर रजनी बुआ के पति ने शराब के नशे में  शर्मा जी के परिवार के बारे में कुछ मजाक में कह दिया | शर्मा जी के परिवार को यह मजाक अच्छा नहीं लगा | उसी दिन से दोनों परिवारों की आपस में बोलचाल बंद हो गई | रिश्तो में आई यह दूरी  दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही चली गई | बात बहुत छोटी सी थी लेकिन दोनों परिवारों ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था | शादी का माहौल  बिगड़े नहीं इसलिए मन में इच्छा होते हुए  भी न तो शर्मा जी ने और न ही उनके परिवार ने रजनी बुआ को आमंत्रित करने की बात कही |

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       आज रात से ही माता की चौकी के साथ ही शादी के समारोह शुरू हो रहे थे | तीन दिन तक लगातार शादी के समारोह चलने थे | आज भी शादी के कई आवश्यक काम करने थे | सुबह राकेश सबसे पहले अपनी बहन जो कि इसी शहर में ब्याही हुई थी को भांजे और भांजी के साथ लेकर आया | लेकिन उसके बाद  से ही राकेश बिना किसी को कुछ  बताये कार लेकर कहीं गया हुआ था |

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       अचानक घर के बाहर राकेश की कार रुकने की आवाज़ आई | लगभग एक मिनट के बाद भैया- भाभी कहाँ हो की आवाज़ आई | शर्माजी को यह आवाज़ पहचानने में देर नहीं लगी | यह तो उनकी बहन  रजनी की ही आवाज़ थी जिसे सुनने के लिए वह तरस रहे थे | सुखद आश्चर्य के साथ शर्माजी भागते हुए बाहर आये | रजनी ने शर्माजी को शादी की अग्रिम बधाई दी | रजनी के पति ने भी शर्माजी को दोनों हाथ जोड़कर बधाई दी उनकी ऑंखें झुकी हुई थी मानो उन्हें अपनी  की हुई गलती का अहसास हो | शर्माजी ने दोनों को गले लगाकर उनका दिल से स्वागत किया |

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        शर्माजी ने छोटी बहन रजनी की तरफ देखकर कहा कि भगवान का शुक्र है कि तू आ तो गई | रजनी ने कहा भैया मैं कैसे नहीं आती आपके द्वारा  तीन बार भेजे संदेशे मिल  चुके थे और आज तो आपने राकेश को कार देकर  मुझे लेने के लिए भेजा था | शर्मा जी ने राकेश की तरफ देखा जो कि पीछे खड़ा मुस्कुरा रहा था |  राकेश ने शर्मा जी के मन की बात को समझते हुए यह सब बड़े गोपनीय तरीके से किया था | शर्मा जी को इस बात से बहुत ख़ुशी और  संतोष हुआ कि उनके बेटे को  रिश्तो की कद्र और  निभाने की समझ है |

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