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Friday, March 2, 2018

सुभाषिनी मिस्त्री अपने गांव के गरीब मरीजों की मसीहा बनी | Humanity Hospital – Ray of Hope for poor patients


Subhashini mistry in front of an Ambulance Humanity Hospital
Image Source : NewIndianExpress

सुभाषिनी मिस्त्री का आरंभिक जीवन / Early life of Ms. Subhashini Mistry  :  सुभाषिनी मिस्त्री का जन्म कुलवा गांव के एक कृषक परिवार में हुआ था जोकि कोलकाता के पास स्थित है | इनका परिवार अत्यंत गरीब था | इनके पिता की  कुल 14 संतान थी  जिसमें से सात की  गरीबी के कारण अकाल मृत्यु हो गई | पारिवारिक स्थिति अच्छी न होने के कारण यह  शिक्षा भी प्राप्त नहीं कर सकी |




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जीवन की दिशा बदलने वाले पल / Turning point of life  :   इनका विवाह  मात्र  12 वर्ष की आयु में गांव हंसपुकुर के एक खेतिहर मजदूर के साथ कर दिया गया था | गरीबी में यह अपने जीवन का निर्वाह कर रहे थी | इनके यहां चार संतान उत्पन्न हुई | जब यह 23 वर्ष की थी,  इनके पति को डायरिया हो गया था | जिनका इलाज इन्होने  सरकारी हस्पताल से करवाना शुरू किया | गरीबी तथा सही चिकित्सा सुविधा के अभाव में इनके पति का अकस्मात निधन हो गया | यह मात्र तेईस   वर्ष की अल्प आयु में ही विधवा हो गई | उनके पति ही परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे | उनकी मृत्यु के पश्चात परिवार की आय का कोई भी स्त्रोत नहीं रह गया था | सुभाषिनी के जीवन में अंधकार हो गया था | उसके माता-पिता की भी वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह सुभाषिनी की कोई  सहायता कर सके | सुभाषिनी इस संसार में बेसहारा हो गई थी | जीवन में आई इस भयानक त्रासदी ने सुभाषिनी मिस्त्री का जीवन ही बदल दिया | उसे यह अफसोस होता रहता था कि उसके पति अच्छी चिकित्सा सुविधा के अभाव के कारण ही मृत्यु को प्राप्त हो गए यदि उन्हें अच्छी चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो जाती  तो उनकी मृत्यु नहीं होती |
बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने की यात्रा / Journey towards big target
सुभाषिनी मिस्त्री ने संकल्प किया कि गांव में एक ऐसा हस्पताल बनना चाहिए जहां पर निर्धन मरीजों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो | जिससे कि किसी भी निर्धन मरीज की   चिकित्सा सुविधा के अभाव से मृत्यु  न हो | उसने ऐसा हस्पताल बनवाने का मन ही मन में निर्णय कर लिया | उसने अपने निर्णय से गांव वालों और परिचितों को भी अवगत करवाया | सभी को यह कार्य असंभव सा प्रतीत हुआ इसलिए  किसी ने भी उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया | लेकिन सुभाषिनी मिस्त्री के शब्दकोष में असंभव शब्द नहीं था | सुभाषिनी मिस्त्री ने अपने सपने को वास्तविकता में बदलने के लिए दिन में मजदूरी करनी शुरू की और शाम को वह सब्जी बेचने लगी | इससे होने वाली आय से वह अपने परिवार का पालन पोषण करती थी  तथा कुछ पैसे अपने हस्पताल बनवाने के सपने को सच करने के लिए जमा करती थी | उसका छोटा  बेटा अजोय  प्रतिभाशाली था | उसे वह डाक्टर बनाना चाहती थी | लेकिन वह अपने चारों बच्चों का भरण पोषण करने के साथ भावी हस्पताल के निर्माण के लिए कुछ पैसे बचाने में असमर्थ हो रही थी |  इसलिए उसने अपने दो बच्चों को अनाथालय में भेज दिया, जिससे कि वह स्वयं दो बच्चों का भरण पोषण कर सकें तथा भविष्य में अस्पताल के निर्माण के लिए कुछ धनराशि भी जोड़ सकें |  बाद में उसका बेटा अजय उच्च शिक्षा प्राप्त करके डॉक्टर बना |
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Subhashini mistry Humanity Hospital Hanspukur, Thakurpukur, Kolkata, West Bengal complete address

सुभाषिनी मिस्त्री का ह्यूमैनिटी हॉस्पिटल (Humanity Hospital)
सुभाषिनी मिस्त्री ने हस्पताल बनवाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था | लगभग 20 वर्ष से अधिक समय तक दिन रात अथक परिश्रम करके अपनी  नाम मात्र की आय से  एक-एक पैसा बचा कर उसने ह्यूमैनिटी  हस्पताल  बनाना आरंभ किया | वर्ष 1992 में उसने अपने गांव में ₹10,000 देकर एक एकड़ जमीन खरीदी | उसमें  सन 1993 में एक कमरे का  अस्थायी   निर्माण करके अस्पताल आरंभ किया गया | इनके पुत्र अजय कुमार मिस्त्री तथा  कुछ अन्य  डॉक्टरों ने यहां पर निशुल्क चिकित्सा सेवा उपलब्ध करनी शुरू की | पहले दिन ही 252 मरीजों का इलाज किया गया | बाद में स्थानीय निवासियों तथा  धार्मिक संस्थाओं आदि के सहयोग से स्थायी  अस्पताल का निर्माण किया गया | सन 1996 में पश्चिम बंगाल के तत्कालीन गवर्नर श्री के वी  रघुनाथ रेड्डी ने इस अस्पताल का उद्घाटन किया | इस हस्पताल में प्रतिवर्ष हजारों मरीजों का निःशुल्क उपचार किया जाता है | आज यह हस्पताल इस  क्षेत्र के निर्धन  मरीजों को नव जीवन दे रहा है | इस प्रकार सुभाषिनी मिस्त्री का मानवता की भलाई के लिए देखा हुआ सपना पूरा हुआ | Humanity Multispeciality Hospital को Humanity Foundation  द्वारा संचालित किया जा रहा है | जिसके अध्यक्ष डॉ अजय कुमार मिस्त्री है | ह्यूमैनिटी हस्पताल अपने नाम के अनुरूप ही मानवता की सेवा में समर्पित हस्पताल है | इस हस्पताल के नारे (slogan) ‘We ensure that no one is denied access to medical services’ से ही यह प्रमाणित हो जाता है | इसमें निर्धन रोगियों का नि: शुल्क उपचार किया जाता है | इस हस्पताल में वास्तव में  यह सुनिश्चित किया जाता है  कि किसी भी जरूरतमंद को धन की कमी के कारण चिकित्सा सेवा का अभाव न रहे | यह हस्पताल निर्धन रोगियों के लिए आशा की एक किरण है |

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पुरस्कार एवं सम्मान / Awards
सुभाषिनी मिस्त्री को स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके द्वारा दिए गए सराहनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने पदम श्री पुरस्कार से सम्मानित किया | इससे पहले सन 2009 में उन्हें प्रतिष्ठित गॉडफ्रे फिलिप्स ब्रेवरी अवार्ड से सम्मानित किया गया था |
सुभाषिनी मिस्त्री ने पुरुष प्रधान समाज में यह प्रमाणित कर दिया कि नारी सब पर भारी है |

Humanity Hospital - निर्धन रोगियों के लिए आशा की एक किरण / Humanity Hospital – Ray of Hope for poor patients
Humanity Hospital - निर्धन रोगियों के लिए जीवन रेखा / संजीवनी
परिचय / Introduction

ह्यूमैनिटी हस्पताल अपने नाम के अनुरूप ही मानवता की सेवा में समर्पित हस्पताल है | इस हस्पताल के नारे (slogan) ‘We ensure that no one is denied access to medical services’ से ही यह प्रमाणित हो जाता है | इसमें निर्धन रोगियों का नि: शुल्क उपचार किया जाता है | इस हस्पताल में वास्तव में  यह सुनिश्चित किया जाता है  कि किसी भी जरूरतमंद को धन की कमी के कारण चिकित्सा सेवा का अभाव न रहे | इस हस्पताल की  संस्थापक सुभाषिनी मिस्त्री हैं | यह अस्पताल ह्यूमैनिटी ट्रस्ट के द्वारा संचालित किया जाता है | सुभाषिनी के पुत्र अजय कुमार मिस्त्री इस ह्यूमन ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं |

जब सुभाषिनी मिस्त्री मात्र 23 वर्ष की थी उनके पति को डायरिया हो गया था | उनका इलाज सरकारी हस्पताल मैं हो रहा था | इनके पति के इलाज पर डॉक्टरों तथा नर्सों द्वारा पर्याप्त ध्यान न देने के कारण उनकी मृत्यु हो गई |

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