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Friday, March 2, 2018

सबकी मनोकामना पूर्ण करेगी कामधेनु गौ माता | Cow will fulfil you every wish


gau mata showing all gods on her body
       सनातन धर्म में गौ माता का महत्व  :  प्राचीन धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भारतीय  संस्कृति में गंगा, गीता तथा गाय को जीवन एवं सृष्टि का आधार स्तम्भ तथा  भगवान द्वारा मनुष्य के कल्याण के लिए रचित सर्वश्रेष्ठ रचना माना गया है | शास्त्रों में गौमाता को सर्वदेवमयी और सर्वतीर्थमयी कहा गया है अर्थात जिसके दर्शन मात्र से तथा सेवा करने से सभी देवताओं और सभी तीर्थों के पुण्य की प्राप्ति हो जाती है | भगवान श्री कृष्ण बाल्यावस्था में गौ माता के पीछे-पीछे नंगे पांव मैदानों, जंगलों में उन्हें चराते हुए घूमते थे | इससे आप सहज अनुमान लगा सकते हैं कि जिस गोमाता पीछे-पीछे स्वयं साक्षात भगवान घूमते हो वह कितनी पूजनीय होगी | भगवान श्रीकृष्ण को गौ माता के साथ-साथ उनके दूध और मक्खन से विशेष प्रेम था | हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि धरती सात महाशक्तियों के बल पर टिकी हुई है | जिसका वर्णन  गाय, विप्र, वेद, सती, सत्यवादी, निर्लोभी एवं  दानी के रूप में किया गया है | इसमें सर्वोच्च स्थान पर गाय को ही रखा गया है | चारों वेदों में 1331 बार गौमाता के विषय में वर्णन किया गया है |




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       वेद पुराणों में गौ माता का महत्व  :  पदम् पुराण के अनुसार गौमाता के शरीर के प्रत्येक अंग में सभी देवी-देवताओं, तीर्थ स्थानों तथा पवित्र नदियों, सरोवरों  का वास है | गौमाता के सींगों में भगवान शिव तथा विष्णु, मस्तक में ब्रह्मा जी, आंखों में सूर्य और चंद्रमा, नाक में  कार्तिकेय, पेट में पृथ्वी, स्तनों में सागर, केशों में 33 कोटि  देवी-देवताओं, अपान (गुदा) में 68 कोटि तीर्थ स्थानों, गोबर में लक्ष्मी, गोमूत्र में गंगा जी, इसके दूध में सरस्वती, दही में नर्मदा, घृत में अग्नि का वास है | इन्हीं अलौकिक गुणों के कारण तथा शांत, मधुर, सौम्य, देवत्व तथा मातृत्व की भोली-भाली मूर्ति भरा गौ माता का स्वरुप और स्वभाव उन्हें पशुत्व से मातृत्व के शिखर तक पहुंचाता है | गाय संपूर्ण विश्व की माता है तथा एक अमूल्य वरदान है |
       गाय के उत्पादों से चिकित्सा  :  गाय के दूध को सुपाच्य तथा अमृत के समान माना जाता है | गौमाता के दूध में स्वर्ण तत्व पाया जाता है, जो कि मोटापा घटाता है तथा शारीरिक बल को बढ़ाता है | विभिन्न देशों में हुई रिसर्च से यह प्रमाणित हुआ है कि गाय के दूध का नियमित सेवन करने से कैंसर की कोशिकाओं का बढ़ना रुक जाता है | जबकि अत्याधुनिक चिकित्सा पद्धतियों तथा नित्य प्रति होती रिसर्चों के बावजूद भी आज तक पूरे विश्व में कैंसर की  कोई भी प्रमाणित औषधि की खोज नहीं हो पाई है | गाय के पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र) को भी औषधियों के रूप में प्रयोग किया जाता है | अनेक असाध्य रोगों में यह रामबाण औषधि सिद्ध हो रहे हैं |

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          गौ सेवा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं  :  यदि हम किसी तीर्थ स्थान पर जाएं तो किसी एक देवी या देवता  के दर्शन कर पाते हैं | उन्ही एकमात्र देवी या देवता का ही आशीर्वाद प्राप्त कर पाते हैं, किंतु  यदि हम गौ माता को चारा खिलाएं या उनकी सेवा  करते हैं तो उनमें विद्यमान 33 करोड़ देवी देवताओं को भोग लग जाता है | वह तृप्त एवं प्रसन्न  होकर शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हैं | इसीलिए गौ सेवा से मनुष्य की मनोकामनाएं सबसे शीघ्र पूर्ण होती हैं | यदि हम धार्मिक स्थान पर जाकर देवी या देवता को प्रसाद का भोग लगाते हैं तो क्या  भोग  लगता भी है या कि नहीं ? आस्था एवं विश्वास के कारण हम ऐसा मान लेते हैं कि भगवान ने हमारा प्रसाद ग्रहण करके भोग लगा लिया है किन्तु यह वास्तव में एक संशय  वाली बात ही होती है | लेकिन यदि हम श्रद्धा भाव से गौ माता को एक रोटी खिलाते हैं, तो उसका वास्तव में ही प्रत्यक्ष रूप से  भोग लगते  हुए हमें दिखाई देता है | इसलिए इसका तत्काल पुण्य  प्रभाव तथा सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने का वरदान  के रूप में परिणाम मिलना भी निश्चित होता है | कोई भी पूजा तब ही पूर्ण होती जब प्रसाद में से कुछ भाग गौ माता के भोग के लिए निकाल देते हैं | गौ माता की महिमा समझने के लिए इतना जानना  ही पर्याप्त है कि गौ माता के गोबर से घर की दीवारों, आंगन तथा  रसोई की लिपाई पुताई करके घर को साफ स्वच्छ किया जाता था, जबकि संसार के प्रत्येक प्राणी के मल को गंदा होने के कारण घर से दूर फेंकते हैं |

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       गरुड़ पुराण में भी वर्णन किया गया है कि गाय, गऊशाला, गोधूलि, गोबर, गौ मूत्र एवं  बछड़े को दूध पिलाती हुई गाय  के दर्शन मात्र से ही पुण्य की प्राप्ति होती है | यदि सभी देवी-देवताओं,  ऋषि-मुनियों और पितरों को एक साथ प्रसन्न करके शुभ आशीर्वाद प्राप्त करना हो तो गौ सेवा से बढ़कर कोई सरल एवं श्रेष्ठ  मार्ग नहीं है |

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        श्री श्यामलाल नरूला जी श्री बालकृष्ण गऊशाला , भैंसरू कलां, सांपला,  हरियाणा के संस्थापक हैं | वह स्वयं 89 वर्ष की आयु में निः स्वार्थ और गौ सेवा के भाव से यह गऊशाला चला रहे हैं |  उनसे मिलने के बाद आपको भी गौ माता की अपार महिमा के विषय में धार्मिक ग्रंथों, वेदों, में दी गयी जानकारी  पर आस्था और विश्वास हो जायेगा | इस गांव के स्थानीय निवासियों से मिली जानकारी के अनुसार इस गांव और इसके आसपास कहीं पर भी मीठा पानी धरती से नहीं निकलता था | लेकिन इस गऊशाला में गौ माता की असीम कृपा और शक्ति से मीठा पानी निकलना स्थानीय लोगों के लिए चमत्कार से कम नहीं  है |

       गौ सेवा में अपना योगदान कैसे करें  :  अपने जीवन में अपनी सामर्थ्य के अनुसार एक गौशाला का निर्माण करवाएं या एक  गाय के चारे की व्यवस्था करें अन्यथा गौ ग्रास  के रूप में सबसे पहली एक रोटी गौ माता के लिए अवश्य निकालें | गौ माता की सेवा, रक्षा तथा उत्थान में सभी को योगदान देना चाहिए | गौ माता की  सेवा से आपके घर परिवार तथा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आनंद ही आनंद की वर्षा तथा लक्ष्मी जी की विशेष कृपा निश्चित रूप से  होगी |

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