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Tuesday, March 6, 2018

कैसे आया बहु की सोच में बदलाव | change in mindset


Image Source : Pixabay
       सचिन और सारिका के घर उनके परिचित ज्योतिषी आये | कहने को तो वह ज्योतिषी थे, लेकिन उन्होंने ज्योतिष को रोजगार का जरिया नहीं बनाया था | वह सरकारी कार्यालय से अधिकारी के पद से रिटायर हुए थे | उन्हें ज्योतिष विज्ञान का बहुत अधिक ज्ञान था | वह केवल अपने कुछ परिचितों को ही शौकिया तौर पर जन्मपत्री आदि देखकर भविष्य की  घटनाओं की जानकारी दे देते थे | उनकी कही हुई अधिकांश भविष्यवाणियां सत्य ही निकलती थी | आवभगत की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सचिन और सारिका ने भी ज्योतिषी से अपने भविष्य के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की | ज्योतिषी ने दोनों की जन्मपत्री देखकर उसका कुछ देर अध्ययन किया | उसके बाद उसने सचिन को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप दोनों का जीवन भी आपकी माताजी जैसा ही होगा | सचिन सारिका का भविष्य बता कर ज्योतिषी जी कुछ ही देर में चले गए |




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       अपना भविष्य जानने के बाद सारिका अत्यंत बेचैन हो गई | बेचैनी के कारण वह सारी रात सो नहीं पाई | उसे याद आ रहा था कि कैसे कुछ साल पहले वह विवाह के बाद इस घर में आई थी | उसकी सास कमला वती को अपने इकलौते बेटे से बहुत प्यार था | सचिन भी  अपनी मां का बहुत आदर और प्यार करता था | सास बेटे का हर काम उसकी रुचि के अनुसार स्वयं करने का प्रयास करती थी | सारिका को यह सब बातें सास की दखलंदाजी लगती थी | सास बेटे-बहू से जितना प्यार करती थी, बहू सास और ननदों से उतनी ही नफरत करती थी | सारिका का दिन प्रतिदिन सास के प्रति दुर्व्यवहार पति के सामने ही बढ़ता जा रहा था | पति के ऑफिस जाने के बाद तो वह सास से बिल्कुल नौकरानियों जैसा बर्ताव ही करती थी | सारिका ने अपनी स्नेहमयी नैक सास का जीवन नर्क बना दिया था |

Image Source : Pixabay
        सचिन द्वारा मां का पक्ष लेने के कारण पति पत्नी में रोज ही लड़ाई झगड़े रहने लगे थे | एक दिन तो सारिका ने सचिन को साफ ही कह दिया था कि अब इस घर में या तो मैं रहूंगी या तुम्हारी मां रहेगी | मां नहीं चाहती थी  कि बेटे का बसा हुआ घर उसके कारण उजड़ जाए | मां ने बेटे से उसे वृद्ध आश्रम छोड़ आने की जिद की | मां की जिद और पत्नी के रोज के लड़ाई झगड़े से दुखी होकर सचिन मां को एक वृद्धाश्रम में छोड़ आया | सारिका यह सोचकर कांप उठी थी कि क्या उसे भी अपनी सास की तरह नौकरानी की तरह जीवन बिताना पड़ेगा ? जीवन का आखिरी समय क्या उसे भी सास की तरह वृद्ध आश्रम में बिताना पड़ेगा ?
       सुबह होते ही सारिका ने सचिन को मां को तुरंत घर वापस ले आने के लिए कहा | अब सारिका को सास लोमड़ी जैसी नहीं बल्कि गाय जैसी लगने लगी थी | जो बातें उसे दखलंदाजी लगती थी वही अब उसे  मां की ममता और प्यार लगने लगी थी | सास वही थी लेकिन नजरिया बदल गया था |

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       सचिन जब मां को घर पर लेकर आया तो सारिका ने  सास से  माफी मांगी और उसकी आरती उतारकर  घर में स्वागत किया | सास मन-ही-मन भगवान को धन्यवाद और बहू को आशीर्वाद दे रही थी | वही सचिन अपनी योजना की सफलता पर मंद मंद मुस्कुरा रहा था |

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