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Friday, February 16, 2018

नेकी की दीवार : परोपकार की दिशा में एक सार्थक कदम || Wall of kindness : A step towards Charity


  दूसरों की भलाई करना ही श्रेष्ठ लोगों की पहचान है | नेकी की दीवार समाज सेवा की दिशा में एक श्रेष्ठ कदम है | यह गरीबी की  रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों के लिए एक आशा की किरण है | सर्वप्रथम इसकी शुरुआत ईरान में हुई | इसे "Wall of Kindness" का नाम दिया गया | यहां पर एक ऐसी भलाई की दीवार बनाई गई जहां पर लोग अपने पुराने और ऐसे घरेलु सामान जैसे  कपड़े , जूते, चादर, कंबल,बर्तन, खाने का सामान आदि जिसको वो इस्तेमाल नहीं कर रहे थे  छोड़ गए | गरीब और अभावग्रस्त लोग अपनी जरूरत के अनुसार यहां से वह चीजें ले जाते थे |


       भारत में भी इसकी शुरुआत इंटरनेट पर ईरान को देख कर की गई | इसको नेकी की दीवार का  नाम दिया गया | भारत के कई शहरों में नेकी की दीवार बनाई गई | दीवार पर एक बैनर लगा दिया जाता है जिस पर लिखा होता है कि "जो आपके पास अधिक है, यहां छोड़ जाएं | जो आपकी जरूरत का है, यहां से ले जाएं" | गरीबों से सहानुभूति की भावना रखने वाले कुछ लोगों द्वारा मिलकर संगठन बनाया जाता है । और लोगों से अपील की जाती है कि वह अपने फालतू और पुराने कपड़े और घरेलू सामान जो कि वह इस्तेमाल न कर रहे हो गरीबों के लिए यहां पर दान करें | दान की  भावना रखने वाले जागरूक लोग यहां पर अपने पुराने कपड़े,  जूते, चादर, कंबल , बर्तन, पुस्तकें, तथा  खाने का सामान आदि यहां पर दे जाते हैं | दीवार पर कपड़े टांगने के लिए खूंटियों की  तथा अन्य सामान रखने के लिए शेल्फों की व्यवस्था होती है | गरीबी रेखा से नीचे जीवन  यापन करने वाले और अभावग्रस्त लोग यहां आकर अपनी जरूरत का सामान उठाकर ले जाते हैं |


       “जीना उसका जीना है जो औरों को जीवन देता है” | दूसरों के जीवन में खुशियों के रंग भरने वाले व्यक्ति को स्वयं भी सुख शांति, संतोष  प्राप्त होते हैं | भलाई के काम में की गई सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती | “यह प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व बनता है कि वह संसार को उतना तो अवश्य लौटा दे,  जितना उसने इससे  लिया है”  -- अल्बर्ट आइंस्टाइन | समाज के सक्षम लोगों को अभावग्रस्त लोगों की भलाई का प्रयास करते रहना चाहिए | इस प्रकार समाज के गरीब वर्ग के वह  लोग जो अपनी सामान्य जरूरतों को पूरा करने में भी असमर्थ होते हैं,  उनको अपनी आवश्यक रोजमर्रा की चीजें मिल जाती हैं | जिनको वह दूसरों से  संकोचवश मांगते हुए झिझकते हैं | इनके जीवन स्तर में कुछ सुधार होता है | और वह सुख पूर्वक अपना जीवन निर्वाह कर पाते हैं | कहते हैं कि अपनी आय के 10वें  भाग को नेकी के कार्य में अवश्य ही  लगाना चाहिए यदि इतना न कर सके तो कम से कम यथासंभव अपने पुराने कपड़े एवं  घरेलु सामान को तो जरूर गरीबों में वितरित करना चाहिए | कुछ संस्थाओं के सदस्यों ने नेकी की दीवार के लिए सहयोग के साथ ही, गरीब और आदिवासी लोगों के बच्चों को पढ़ाने का कार्य भी शुरू किया है | यह एक सराहनीय प्रयास है |



       रायपुर में भी ऐसे ही एक नेकी की दीवार बनाई गई | शहर के लोगों ने उस में रुचि दिखाई और सहयोग देना शुरु कर दिया | कुछ समय के बाद प्रशासन ने एक आधुनिक भव्य कलाकृतियों वाली नेकी की दिवार का निर्माण करवा दिया,  तथा मुख्यमंत्री रमन सिंह ने उसका उद्घाटन किया | यह सरकार का एक प्रशंसनीय कदम है | सरकार द्वारा इस प्रकार प्रोत्साहित करने से तथा मीडिया में भी ऐसी खबरें आने से जनता की रूचि और सहयोग बढ़ता है | सरकार को ऐसी सकारात्मक भूमिका निभाते रहना चाहिए,  तभी समाज मे अमीर गरीब के बीच की खाई कम होगी | सरकार द्वारा ऐसे जरूरतमंद लोगों के लिए अपनी ओर से नाइट शेल्टर और कंबल वितरण आदि की व्यवस्था की जाती है | लेकिन केवल सरकार के प्रयास पर्याप्त नहीं है | समाज के उच्च और मध्यम वर्ग को अपनी जिम्मेदारी  समझते हुए इसमें अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी |

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