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Friday, February 16, 2018

बदलती परिस्थतियाँ बदलती सोच || Thinking changing as per the situation


किसी शहर में एक बड़ा धनी सेठ  रहता था | उसने अपने रहने के लिए एक अत्यंत सुन्दर और भव्य मकान का निर्माण करवाया | मकान के निर्माण के काम में शहर के सबसे कुशल कारीगरों, मिस्त्रियो को लगाया गया था इसलिए मकान वास्तव में इतना सुन्दर बना था कि उसकी गिनती शहर के सबसे सुन्दर और भव्य मकानों में होती थी | मकान की प्रसिद्धि पूरे शहर में हो गई थी | लोग दूर-दूर से मकान को देखने आते थे और उसकी प्रशंसा करते थे | सेठ भी अपने मकान को देख-देख कर फूला नहीं समाता था | उसे इस मकान से बड़ा मोह हो गया था |




 एक बार वह किसी काम से महीने भर के लिए शहर से बाहर गया | जब वह वापस आया तो उसने देखा कि उसके भव्य मकान में भयंकर आग लगी हुई है | मकान के आस पास सैकड़ो लोग इकठे होकर देख रहे हैं | लेकिन आग इतनी भयंकर तरह से फैली हुई है कि कोई भी भयानक आग को बुझाने की स्थिति में नहीं है | सेठ दुःख और निराशा के कारण असहाय होकर नम आँखों के साथ वही बैठ गया |


इतने में उसका पुत्र आया और पिता को सांत्वना देते हुए बोला, 'पिताजी आप चिंता न करे मैंने एक सप्ताह पहले ही यह मकान इस जिले के सबसे बड़े सेठ को बहुत महँगे दाम पर बेच दिया है | वह दाम इतना ज्यादा दे रहा था तथा इतनी जल्दी  खरीदना चाहता था कि हमने आपके आने का इंतजार करना उचित नहीं समझा ' |   यह सुनकर सेठ ने मन ही मन भगवान का शुक्र अदा किया कि उसने इतना बड़ा नुकसान होने से बचा लिया | अब सेठ बहुत राहत महसूस कर  रहा था | उसके चेहरे से दुःख के भाव समाप्त हो चुके थे | पहले जब अपना मकान जलते देख रहा था तो चेहरे पर असहनीय दुःख के भाव थे | लेकिन जब पता चला कि मकान अब किसी दूसरे का है,  तो उसे राहत महसूस हो रही थी | अब वह शांति के साथ वहां पर उपस्थित आस-पास के लोगो से बात करने लग गया |
इतने में उसका दूसरा पुत्र आ गया  | उसने बताया  कि, 'अभी तो खरीदार ने केवल थोड़ी सी अग्रिम राशि ही दी है शेष राशि का भुगतान अगले सप्ताह करना था | लेकिन अब वह मकान  जलने के बाद शेष राशि का भुगतान नहीं करेगा ' | अब परिस्थिति बदल गई थी |  इतना  सुनते  ही  सेठ के चेहरे के शांति राहत के भाव गायब हो गए और दुःख बेबसी के भाव दोबारा आ गए,  क्योकि मकान पराया नहीं अपना ही जल रहा है | सेठ असहाय होकर आँखों में नमी के साथ तनावग्रस्त अवस्था में  फिर बैठ गया |


 तभी सेठ का भाई आ गया और उसने कहा कि , 'मकान खरीदने वाला अपने वचन का पक्का है मेरी अभी उससे बात हुई है वह शेष राशि नियत तिथि  को  देने को तैयार है | उसका कहना है कि अब यह मकान मेरा हो चुका है ' | एक बार फिर  सेठ बहुत राहत महसूस कर  रहा था,  दुःख के भाव  फिर समाप्त हो गए थे |


यदि उपरोक्त परिस्थितियों पर विचार करें तो दिखाई देता है कि वास्तव में बदला कुछ भी नहीं था | केवल सोच बदली थी कि मेरा मकान   जल रहा है / पराया मकान जल रहा है | इसी सोच के कारण ही मनः स्थिति में फर्क आ  रहा था  | उसके दुखों का मूल कारण  उस संपत्ति का अपने होने का एहसास मात्र था | इसीलिए  वह उस सम्पति   के नुकसान के कारण दुख अनुभव कर रहा  था | लेकिन जब उसे वही संपत्ति किसी पराए की होने का एहसास हुआ तो उसका दुख समाप्त हो गया | इस प्रकार मोह माया में लिप्त रहने से व्यक्ति दुखी रहता है | सांसारिक वस्तुओं से जितनी अधिक मोह माया होगी, उतना ही अधिक दुख होगा | मोह माया के बंधनों से छूटते ही मन में असीम  शांति के भाव आने लगते हैं | संसार में दुखों का मूल कारण मोह माया में लिप्त रहना ही  है |

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