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Saturday, February 24, 2018

माउंटेन मैन दशरथ मांझी ने फौलादी हौसलों से पहाड़ को मिट्टी बना दिया || Mountain Man : Dashrath Manjhi


परिचय / Introduction : यह प्रेरक कहानी एक ऐसे इंसान की है जिसने पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का असम्भव सा प्रतीत होने वाला संकल्प लिया और उसे अकेले पूरा करके दिखाया | ऐसा साहसिक कार्य आज तक न तो भारत में ही कोई कर सका है और न ही पूरे विश्व में ऐसा साहसिक कार्य कोई कर पाया है | पूरे विश्व में ऐसा महान काम केवल एक व्यक्ति द्वारा करके दिखाने की दूसरी कोई मिसाल नहीं है |




दशरथ मांझी का आरम्भिक जीवन / Early life of Mountain Man Dashrath Manjhi  :  इस  साहसिक व्यक्ति का नाम दशरथ मांझी है | इनका जन्म सन 1934 में बिहार में  गया के नजदीक गहलौर  गांव में हुआ था | यह एक पिछड़ा हुआ गांव था | यहां पर बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था  | आम जरूरत की चीजें लेने के लिए भी नजदीक के कस्बे में जाना पड़ता था | गांव से कस्बे तक पहुंचने के लिए रास्ते में पड़ने वाले एक पहाड़ का पूरा चक्कर लगाना पड़ता था |



जीवन की दिशा बदलने वाले पल / Turning point of life  :  दशरथ मांझी गाँव के माहौल के कारण ज्यादा पढ़ लिख नहीं सका | बड़ा होने पर अपना जीवन यापन करने के लिए वह मजदूरी करने लगा | इसका विवाह फाल्गुनी  देवी नाम की एक सुशील और संस्कारी लड़की से हुआ | इनका वैवाहिक जीवन आनंदपूर्वक  बीत रहा था | कुछ समय के बाद फागुनी देवी गर्भवती हो गई | दशरथ मांझी नजदीक के खेतों में ही  मजदूरी का काम करता था | घर से खेतों तक पहुंचने के लिए रास्ते में पहाड़ी पर चढ़ कर आना पड़ता था | फाल्गुनी देवी दोपहर का भोजन बनाकर अपने पति को खेतों में ही खिलाने के लिए आ जाती थी |


 ऐसे ही एक  दिन फाल्गुनी देवी भोजन लेकर दशरथ मांझी के पास जा रही  थी  तभी उसका पैर पहाड़ पर से  फिसल गया और वह  पहाड़ से फिसल कर दर्रे में गिर गई | दशरथ मांझी भोजन करने के लिए फाल्गुनी  देवी के आने का इंतजार कर रहा था, तभी  उसे सूचना मिली कि फाल्गुनी देवी पहाड़ से गिर गई है | दशरथ भागता हुआ फाल्गुनी देवी के पास पहुंचा | वहां  पहुंचकर उसने  देखा कि फाल्गुनी देवी खून से लथपथ है | गांव में चिकित्सा के लिए किसी अस्पताल की व्यवस्था नहीं थी | इलाज के लिए नजदीक के कस्बे में स्थित अस्पताल में ही जाना पड़ता था | उसे लेकर वह इलाज के लिए नजदीक के कस्बे के हस्पताल की ओर गया | लेकिन कस्बे तक पहुंचने के लिए पहाड़ का पूरा चक्कर लगाकर ही पहुंचना संभव था | जिस कारण उसे हस्पताल पहुंचने में  काफी विलम्ब हो गया | गर्भ में पल रही बच्ची का जीवन तो बच गया लेकिन फाल्गुनी देवी का निधन हो गया | दशरथ मांझी के ऊपर मानो दुखों का  पहाड़ ही टूट पड़ा | दशरथ मांझी व्यथित था क्योंकि इस पहाड़ के कारण उसकी  जीवन संगिनी  हमेशा के लिए उससे बिछड़ गई थी | इसी पहाड़ के कारण उसके बच्चों के सिर से मां की ममता का साया हमेशा के लिए हट गया था | इस घटना ने दशरथ मांझी के जीवन की दिशा ही बदल दी थी |


बड़े लक्ष्य का संकल्प / Resolution of big goal :  भविष्य में किसी की चिकित्सा सुविधा में विलंब के कारण मृत्यु न हो यह सोच कर दशरथ मांझी ने पहाड़ काटकर मार्ग बनाने का निश्चय किया | दशरथ मांझी एक छेनी और हथौड़ी लेकर पहाड़ काटकर रास्ता बनाने के उद्देश्य से पहाड़  तोड़ने चला गया | उसके परिचितों ने उसे समझाने का प्रयास किया कि यह कार्य मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है | पहाड़ को काटकर रास्ता बनाने की कल्पना को हकीकत में  बदलना आसान नहीं है | लेकिन दशरथ मांझी के शब्दकोष में असंभव शब्द ही नहीं था | दशरथ मांझी ने लोगों की प्रतिक्रिया की परवाह नहीं की और वह अपने काम में जुटा रहा |  दिन, महीने, साल तेजी से बीतने लगे वह अकेला ही यह काम करता रहा | अंत में बाईस साल (1960-1982) के अथक परिश्रम के बाद दशरथ मांझी 360 फुट चौड़ा, 25 फुट गहरा, 30 फुट चौड़ा रास्ता बनाने में सफल हुआ | दशरथ मांझी द्वारा निर्मित इस सड़क के कारण अत्रि और वजीरगंज ब्लॉक की दूरी 55 किलोमीटर से मात्र 15 किलोमीटर रह गई | दशरथ मांझी की बनाई  सड़क से वहां के लोगों की  जीवन की राह आसान हो गई है |


दशरथ मांझी का  इंटरव्यू / Interview of Dashrath Manjhi (The Mountain man)  :  दशरथ मांझी का साक्षात्कार  लेते हुए उनसे पूछा गया कि इतने  वर्षों के अकेले अथक प्रयास के दौरान वह विचलित नहीं हुए तो उन्होंने कहा कि मैंने फैसला कर लिया था कि 'जब तक पहाड़ को तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं' | इनके जीवन पर आधारित फिल्म " द माउंटेन मैन " वर्ष 2015 में बनी जिसमें दशरथ मांझी की भूमिका बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने निभाई |


सम्मान एवं पुरस्कार / Award  :  दशरथ मांझी ने अपने अटूट हौंसले से पहाड़ को तोड़ने का ऐतिहासिक कार्य संपन्न किया | उनके इस सराहनीय प्रयास के लिए उन्हें सरकार द्वारा सम्मानित भी किया गया | वर्ष 2006 के लिए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया | मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने उनके गांव में दशरथ मांझी के नाम पर अस्पताल बनाने की घोषणा की है | सामान्य तौर पर किसी व्यक्ति को पुरस्कार देने से उस व्यक्ति का ही सम्मान बढ़ता है, लेकिन कुछ व्यक्ति ऐसे अपवाद होते हैं जिन्हें पुरस्कार देने से उस  पुरस्कार का भी सम्मान बढ़ता है | दशरथ मांझी का नाम अद्वितीय होंसलों का पर्याय बन गया है | दशरथ मांझी द्वारा किया गया यह कार्य इसलिए भी मानवता की बुलंदियों से ऊपर है क्योंकि उन्होंने यह कार्य अपने किसी व्यक्तिगत लाभ या अपना कोई व्यक्तिगत कीर्तिमान स्थापित करने की भावना से नहीं किया था  | लंबी बीमारी के बाद 17 अगस्त 2007 को दिल्ली के एम्स  हस्पताल में गाल ब्लैडर के कैंसर के कारण उनकी 73 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई | दशरथ मांझी के जीवन से हमें यह संदेश मिलता है कि कैसे दूसरों की भलाई के लिए जीवन पर्यन्त समर्पित भाव से कार्य किया जा सकता है | मानवता के कल्याण के लिए  दशरथ मांझी ने जिस असाधारण होंसले से यह ऐतिहासिक कार्य किया राष्ट्र उस महान जज्बे को सादर नमन करता है |

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