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Monday, February 12, 2018

महादेव की कृपा से अपने भाग्य को सौभाग्य में, सौभाग्य को परम् सौभाग्य में बदलें || Maha Shivratri 2018

महाशिवरात्रि का महत्व, कथा, पूजा के विशेष मंत्र, पूजा की विधि, पूजा का समय, और पूजा में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए |

महाशिवरात्रि : महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव पहली बार शिवलिंग में प्रकट हुए थे | धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का पूजा की दृष्टि से विशेष महत्व है | इसी दिन ही यह ज्योतिर्लिंग अलग अलग जगह पर प्रकट हुए थे |



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 शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था | इस दिन ही भगवान शिव ने वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था | ऐसा माना जाता है कि इस दिन उपवास रखने से भोले  शंकर जी प्रसन्न होकर  विशेष कृपा करते हैं | यह भोले  शंकर जी का सबसे महत्वपूर्ण व्रत है | इस दिन भक्त  भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उपवास रखते हैं | इस  दिन प्रत्येक  गांव एवं शहर के हर छोटे, बड़े मंदिर से लेकर अलग-अलग प्रदेश में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों तक में भक्तों की अपार भीड़ लगी होती है और  ॐ नमः शिवाय की ध्वनि गूँज रही होती है | शिवरात्रि हर महीने कृष्ण चतुर्दशी को होती है | महाशिवरात्रि माघ मास की  कृष्ण चतुर्दशी के दिन सम्पूर्ण  भारत में मनाई जाती है |  भारत के कुछ भागों में इस वर्ष 13 फरवरी और कुछ भागों में 14 फरवरी को महा शिवरात्रि मनाई जाएगी | महाशिवरात्रि पूजन हेतु शुभ मुहूर्त मध्यरात्रि 13 फरवरी से लेकर अगले दिन 14 फरवरी तक रहेगा | इस दिन महादेव की पूजा सुबह के 7:30 बजे से लेकर दोपहर के 3:20 बजे तक की जा सकती है | भगवान शिव की पूजा अर्चना कर के दुर्भाग्य को सौभाग्य में और सौभाग्य को परम सौभाग्य में बदला जा सकता है |

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देवों के देव महादेव की उपासना देवताओं से लेकर दानव तक सभी ने की है | देवताओं से लेकर दानव तक सभी संकट की स्थिति में भगवान शिव की शरण में ही गए हैं और उनसे मनोवांछित वरदान प्राप्त किया है | भगवान शिव त्रिदेवों में से एक है | भगवान शिव को अनादि माना गया है | अनादि से अभिप्राय है जिनका न जन्म हो न अंत | शिव महापुराण के अनुसार भगवान शिव अपने आप जन्मे (स्वयंभू) हैं | उनके कोई भी माता-पिता नहीं है | मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आराध्य देव भी भगवान शिव है | भगवान श्री कृष्ण ने भी शिव भगवान की ही आराधना की थी | भगवान शिव सर्व शक्तिमान है | उनकी ही कृपा से सृष्टि की रचना हुई और वह चल रही है | प्राचीन वेदों पुराणों के अनुसार हिंदू धर्म में 33 करोड़ देवी देवताओं का वर्णन किया गया है | लेकिन उन सब में सबसे अधिक भगवान शिव की ही पूजा की जाती है | भगवान का उसकी असीम कृपाओं के लिए धन्यवाद करने के लिए और अपने लिए शुभ मंगल की कामना के लिए उनकी पूजा करते हैं | भगवान शिव अपने भक्तों की भक्ति से शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं |

यद्यपि भक्ति के लिए हर पल ही श्रेष्ठ है लेकिन फिर भी कुछ विशेष दिनों का अधिक ही महत्व है | सावन के सोमवार को तथा महा शिवरात्रि पर भगवान शिव की अधिक पूजा अर्चना की जाती है | भगवान शिव की पूजा उनके साकार रूप तथा शिवलिंग रूप दोनों में ही समान रूप से की जाती है | किसी भी रूप में की गई शिव उपासना फलदायी है |

शिवलिंग : शिवलिंग की भगवान शिव के प्रतीक के रूप में पूजा अर्चना की जाती है | शिव और शक्ति ही सृष्टि का आधार है | शिव और शक्ति के संयुक्त रुप से ही शिवलिंग बना है | शिव का अर्थ है - 'कल्याणकारी' | लिंग का अर्थ है - 'सृजन' | शिवलिंग नाम से ही इसके महत्व का ज्ञान होता है | शिवलिंग के ऊपर वाले भाग में स्वयं भगवान शिव, मध्य में विष्णु तथा मूल में ब्रह्मा जी का वास होता है |

भगवान शिव की पूजा विधि के अनुसार भगवान शिव पर और शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है | ऐसी मान्यता है कि जल से अभिषेक करने से सुख शांति की प्राप्ति होती है | शिवलिंग का अभिषेक गन्ने के रस से करने से भक्त को लक्ष्मी की प्राप्ति होती है | गाय के घी से अभिषेक करने से स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है | मीठे जल से अभिषेक करने से आराधक की संतान की कामना पूर्ण होती है | भगवान शिव पर पुष्प, धतूरा, बेर, बेल के पत्ते और इसका फल तथा  भांग आदि चढ़ाए जाते हैं | पूजा सामग्री में कुछ चीजें प्रतिबंधित होती हैं जिन्हें शिव भगवान पर नहीं चढ़ाना चाहिए |. भगवान शिव की पूजा में लाल रंग के फूल, केतकी  और केवड़े के फूल भी नहीं चढ़ाए जाते हैं | शंकर जी और शिवलिंग की पूजा में शंख का प्रयोग नहीं किया जाता | पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग भी वर्जित होता है | शिव पूजा में हल्दी भी नहीं  चढ़ाई जाती, क्योंकि यह स्त्रियों के सौंदर्य प्रसाधन के रूप में प्रयोग की जाती है | भगवान शिव संहारक के रूप में जाने जाते हैं | सिन्दूर जीवन का प्रतीक होता है इसलिए  शिवलिंग पर सिंदूर या कुमकुम नहीं चढ़ाते |

 शिव भगवान की पूजा के विशेष मंत्र :-

1.        ओम नमः शिवाय --  संसार में अधिकतर भक्तों द्वारा इसी मंत्र का जाप किया जाता है  | मान्यता है कि इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करने से भक्तों की  सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं |
2.        कर्पूरगौरं करुणावतारं, संसारसारं भुजगेन्द्रहारम |
सदा वसन्तं हृदयारविंदे, भवं  भवानी सहितं नमामि ||
भवानीशंकरौ वन्दे श्रद्धा विश्वास रुपिणौ |
याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्ध: स्वान्त: स्थमीश्वरम ||
3.       ॐ त्र्यमबकं यजामहे सुगन्धिम्पुष्टिवर्धनम |
       उर्व्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय  मामृतात् ||
महामृत्युंजय मंत्र -  यह मंत्र जीवन की सभी समस्याओं का समाधान करने वाला मंत्र है | मोक्ष प्रदान करने वाला है |

बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ हैं "मांग बंदे मांग उस भगवान से, क्या मिलेगा मांगकर इंसान से, मांग बंदे मांग उस भगवान से" | जितना आपको सारे संसार से भी नहीं मिलेगा उससे कहीं अधिक केवल करुणानिधान, करुणा के सागर  भगवान शिव की शरण में जाने से ही मिल जायेगा | आवश्यकता केवल उनके श्रीचरणों में झुककर श्रद्धा से नमन करके शुभ आशीष प्राप्त करने की है | अटूट विश्वास रखें भगवान शिव की पूजा अर्चना कर के दुर्भाग्य को सौभाग्य में और सौभाग्य को परम सौभाग्य में निः संदेह/ निश्चित रूप से बदला जा सकता है |


1 comment:

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