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Monday, February 12, 2018

होटल के वेटर से मैनेजर बनने तक का सफर || Journey from hotel waiter to the manager


रात्रि के 11 बज रहे थे | तेज बरसात  हो रही थी | सर्दी इतनी बढ़ गयी थी की लोग बुरी तरह से कांप रहे थे | एक  होटल के बाहर कार रुकी और उसमे से निकलकर एक पति- पत्नी  मैनेजर के पास आये और रहने के लिए एक कमरा माँगा  | मैनेजर ने कहा कि 'इस समय हमारे होटल में कोई भी खाली कमरा उपलब्ध नहीं है' | तब दम्पति ने कहा कि, 'हम यहां आने से पहले कुछ होटलों में गए थे लेकिन  कहीं पर भी खाली कमरा नहीं मिला |  इस  समय बरसात के कारण हम कहीं जा नहीं सकते, कृपा करके आप ही कुछ व्यवस्था करें |  मैनेजर ने अपने को पूर्णतः असमर्थ बताते हुए पुनः किसी और होटल में व्यवस्था करने के लिए कहा | निकट ही एक वेटर  खड़ा हुआ था तथा सारी बात सुन रहा था | उसके मन में दम्पति कीं परेशानी को देखकर उनके प्रति सहानुभूति की भावना पैदा हुई और उसने मन ही मन इन दम्पति की मदद करने का निर्णय लिया | उसने झिझकते हुए दम्पति से कहा, 'यदि आपको असुविधा न हो और बुरा न लगे तो मैं अपना छोटा सा कमरा आपको रात भर के लिए देकर आपकी मदद कर सकता हूँ जो की  होटल की तरफ से मुझे रहने के लिए दिया गया है | दम्पति ने पूछा कि यदि आप हमें अपना कमरा दे दोगे तो आप इस सर्दी की भयंकर रात में कहां रहोगे | वेटर ने कहा कि मैं रात भर होटल में ही कहीं पड़ा रहूंगा |  पति-पत्नी की सहमति मिलने पर वेटर ने  उनके  रहने की व्यवस्था अपने कमरे मैं कर दी | वेटर को इस दम्पति की मदद करके असीम संतुष्टि की अनुभूति हो रही थी | अगले दिन दम्पति वेटर का धन्यवाद करके तथा उसका नाम पूछकर चले गए  |






            कई साल के बाद अचानक एक दिन उस वेटर को एक पत्र मिला जो कि किसी होटल के मालिक का था  | उस पत्र के साथ ही उसके लिए  अमरीका आने के लिए टिकट भी था और उसे शीघ्र आकर मिलने के लिए कहा गया था | वेटर दिए गए पते पर अमरीका पहुंच कर पत्र लिखने वाले व्यक्ति से मिला | वेटर को मिलने पर लगा कि मैं इनसे पहले मिल चुका हूँ  वह उन्हें पहचानने का प्रयत्न करने लगा | उस व्यक्ति ने वेटर को अपना परिचय दिया कि मैं इस होटल का मालिक हूँ  | मैं इस होटल मैं आपका स्वागत करता हूँ और आपको इस होटल का मैनेजर नियुक्त करता हूँ | तब तक  वेटर भी पहचान चुका था की यह वही सज्जन हैं जिन्हे कई वर्ष पहले मैने अपने छोटे से कमरे मैं ठहराया था | वेटर ने कहा कि, 'आप मुझ पर इतना विश्वास कर रहे हैं उसके लिए आपका धन्यवाद लेकिन मैं यह कार्य नहीं कर सकता  क्योंकि इतने बड़े पद पर कार्य करने के लायक मेरे पास अनुभव और योग्यता नहीं है '| मालिक ने कहा की, ' मैनेजर के लिए अनिवार्य योग्यता तो केवल आप मैं ही है | आपकी योग्यता तो मैंने तभी देख ली थी जब आपने सहानुभति और सेवा की भावना  से हमारी मदद करने के लिए अपने आराम की भी परवाह नहीं की | मुझे ऐसी ही सहानुभूति और सेवा की भावना से मदद करने की योग्यता रखने वाले मैनेजर की ही आवश्यकता है | और ऐसी योग्यता आप मैं ही है | अपनी एक छोटी सी भलाई का ऐसा ईनाम पाकर वेटर की ऑंखें ख़ुशी से नम हो गई | उसे महसूस हुआ कि आज उसे उससे भी कहीं बड़ा नेकी का  फरिश्ता मिल गया है | नेकी और इंसानियत की राह पर चलने की उसकी सोच को आज और बल मिल गया था |

           
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यदि आप किसी की मदद करके उसके  जीवन में खुशियों के पल लाते हैं तो वह पल आपके जीवन मैं भी लौटकर अवश्य आते हैं | इसी  प्रकार जब आप अपने व्यवसाय में या अपनी नौकरी में अपनी जिम्मेदारी से बढ़कर कुछ अतिरिक्त योगदान या सेवा करते हैं तो उसका प्रतिफल आपको अवश्य मिलता है | उपरोक्त कहानी मैं भी वेटर ने अपनी जिम्मेदारी से बढ़कर कुछ अतिरिक्त सेवा / योगदान की जबकि होटल मैं आने वाले ग्राहकों के लिए कमरे की व्यवस्था करना उसका काम नहीं था बल्कि होटल के मैनेजर का काम था |

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