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Wednesday, February 28, 2018

अच्छे पड़ोसी बुरे पड़ोसी || Good Neighbor Bad Neighbor


      
       जनवरी का महीना था | सर्दी अधिक होने के कारण धूप में बैठना सुखद लग रहा था | ओम प्रकाश जी एक मृदुभाषी स्वभाव के सज्जन व्यक्ति थे | इसलिए पड़ौसी उनका आदर करते थे | ओम प्रकाश जी घर के बाहर बैठ कर धूप का आनंद ले रहे थे | तीन चार  पड़ौसी भी उनके पास ही आकर बैठ गए  और धूप का आनंद लेने लगे |





        ओम प्रकाश जी के साथ वाले नवनिर्मित मकान को देखने के लिए कुछ लोग आए | मकान को देखने के बाद वह ओम प्रकाश जी के पास आ गए | और उनसे कुछ जानकारी लेने लगे | इस क्षेत्र में किसी प्रकार की असुविधा तो नहीं इस बारे में उन्होंने जानकारी मांगी तथा नवनिर्मित मकान कैसा बना है उसके बारे में भी कुछ पूछताछ की | अंत में उन्होंने पूछा कि यहां के पड़ोसी कैसे हैं | ओम प्रकाश जी ने उत्तर देने के स्थान पर उनसे ही प्रश्न किया कि आप जहां पर रह रहे हैं वहां पर आपके पड़ोसी कैसे हैं | उन्होंने उत्तर दिया कि वहां के पड़ोसी बहुत ही अच्छे स्वभाव के हैं | हमारा तो वहां से मकान छोड़कर आने का दिल ही  नहीं कर रहा लेकिन मकान छोटा होने के कारण बड़े मकान में शिफ्ट करना हमारे लिए जरूरी हो गया है | ओम प्रकाश जी ने कहा आप इस बात की तनिक भी चिंता न करें | यहां के लोग भी बहुत प्रेम प्यार से रहने वाले सज्जन स्वभाव के लोग हैं | वह लोग धन्यवाद करके विदा हो गए |


       कुछ ही देर बाद कुछ दूसरे लोग उसी मकान को खरीदने के इरादे से देखने आए | उन्होंने भी मकान का अच्छी प्रकार से अंदर बाहर से निरीक्षण किया | उसके बाद वह भी ओम प्रकाश जी के पास ही आ गए और उनसे लगभग वही जानकारी मांगने लगे | सारी जानकारी लेने के बाद उन्होंने भी वही सवाल पूछ लिया कि यहां के पड़ोसी कैसे हैं | ओम प्रकाश जी ने पहले की ही तरह उनसे ही प्रश्न किया कि आप वर्तमान में जहां पर  रह रहे हैं वहां पर आपके पड़ोसी कैसे हैं | उन्होंने उत्तर दिया कि उनके पड़ोसी बुरे स्वभाव के हैं | वह वहां पर रोज  के लड़ाई झगड़ों के कारण  दुखी हो गए थे | इसीलिए वह जगह छोड़ने का इरादा किया है | तब ओमप्रकाश जी ने बताया कि यहां के लोग भी उतने ही लड़ने वाले स्वभाव के हैं | मैं तो स्वयं यहां से दुखी होकर यहां से जाने का विचार कर रहा हूं | इन लोगों ने पहले वाले लोगों की तरह धन्यवाद करने की कोई आवश्यकता नहीं समझी और विदा हो गए |


        यह सब देख सुन रहे पड़ोसियों को अत्यंत आश्चर्य जनक लगा | ओम प्रकाश जी जैसे सज्जन पुरुष ने अलग अलग लोगों को अलग-अलग विपरीत जानकारी क्यों दी | उन्होंने ओमप्रकाश जी से इसका कारण पूछा | ओम प्रकाश जी ने स्पष्ट किया कि पहले आने वाले लोग स्वयं ही सकारात्मक सोच वाले अच्छे स्वभाव के लोग थे | इसलिये उन्हें अपने  सब पड़ोसी अच्छे लगते थे | और वह सब के साथ प्रेम पूर्वक रहते थे | उनसे ऐसी आशा की जा सकती है यदि वह यहां पर आते हैं तो वह यहां पर भी प्रेम पूर्वक ही रहेंगे | लेकिन दूसरे लोग नकारात्मक सोच और बुरे स्वभाव के थे | इसीलिए उन्हें अपने पड़ोसी भी बुरे लगते थे और वह उनसे रोज लड़ते झगड़ते रहते थे |  ऐसी संभावना  है कि यदि  वह यहां पर शिफ्ट होकर आते तो वह यहां पर भी लड़ाई झगड़े ही करते रहे | यह सब सुनने के बाद सबको ओम प्रकाश जी की सोच ही सार्थक सोच लगी |

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