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Monday, February 19, 2018

सहनशीलता - परिवार की एकता का आधार || Tolerance - the basis of unity in family


प्राचीन समय की बात है जापान में एक यशस्वी सम्राट होते थे जिनका नाम सम्राट यमातो था | उनका अपना एक छोटा सा परिवार था | परिवार छोटा होने के बावजूद  भी इसमें अक्सर पारिवारिक मतभेद रहते थे | सम्राट इस कारण काफी परेशान रहता था | जीवन में उसे सभी सुख प्राप्त थे लेकिन पारिवारिक प्रेम, स्नेह की कमी महसूस होती थी | सम्राट अपने परिवार के सदस्यों में एकता और प्यार का सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने का प्रयास करता रहता था | लेकिन उसके प्रयास सफल नहीं हो पा रहे थे | वह इसके किसी स्थायी हल की तलाश में रहता था |





सम्राट का एक भूतपूर्व मंत्री था जिसका नाम ओ-चो-सान था | उसका परिवार एक संयुक्त परिवार था जिसमे लगभग एक हज़ार सदस्य इकट्ठे रहते  थे | इस  परिवार की  ख्याति दूर-दूर तक पहुंची हुई थी | इतने परिवार के सदस्य होने के बावजूद भी उनके यहां एक ही रसोई में सबके लिए भोजन बनता था | लोग इस परिवार के प्रेम और एकता के उदाहरण देते थे | एक दिन  सम्राट के कानो तक   भी इस परिवार की ख्याति के किस्से पहुंचे | सम्राट यह जानकर अत्यंत प्रभावित हुआ तथा हैरान हुआ कि इतने सारे परिवार के सदस्य एक साथ प्रेम से कैसे रह रहे हैं | वह इस सूचना की सत्यता की स्वयं जाँच करना चाहता था इसलिए  उसने निर्णय लिया की वह स्वयं उनके घर में बिना किसी पूर्व सूचना के जाकर देखेगा | वह यह रहस्य जानना चाहता था क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि सम्भवतः  इस रहस्य से  उसके परिवार के सदस्यों के आपसी संबंधों में भी सुधार हो सकेगा |

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सम्राट एक दिन अचानक ओ-चो-सान के घर पहुंच गया | ओ-चो-सान के परिवार  के सदस्यों ने सम्राट का यथा योग्य स्वागत किया | सान अब बिलकुल वृद्ध हो चुका था  तथा घर के आंगन में ही लेटा हुआ था | सम्राट ने कुशल मंगल पूछने की औपचारिकता पूरी करने के बाद ओ-चो-सान से पूछा कि, ' आपके परिवार के प्रेम  और एकता का उदाहरण सारे देशवासी देते हैं | इस प्रकार इतने बड़े परिवार को एक सूत्र मैं बांधकर रखने का क्या रहस्य है यह बताइये | वृद्धावस्था के कारण सान ज्यादा बोलने में असमर्थ था उसने इशारे से अपने पोते से  कागज पेंसिल मंगवाई और उसमे कुछ लिखकर सम्राट की तरफ बढ़ा दिया | सम्राट यह राज जानने के लिए पहले से ही बहुत उत्सुक हो रहा था  उसने  कागज  की और देखा उसमे एक ही शब्द तीन बार लिखा हुआ था “सहनशीलता,  सहनशीलता, सहनशीलता” | सान ने बताया की सहनशीलता ही मेरे परिवार की एकता और अटूट प्रेम का राज है | सहनशीलता के सूत्र से ही मेरा परिवार संयुक्त रूप से बंधा हुआ है |


उपरोक्त   कहानी से  हमे  यह  शिक्षा  मिलती  है  कि सहनशीलता ही परिवार की एकता और सुखों का आधार है | एक दूसरे के प्रति सहनशीलता, छमा, प्रेम की भावना ही रिश्तों को आपसी प्रेम प्यार से जोड़े रखती है | दूसरों की  ख़ुशी को प्राथमिकता देना जरूरी है | इस  प्रकार  सम्राट  की  जिज्ञासा  भी  शांत   हो  गई |


आजकल व्यक्तिगत स्वतंत्रता की चाहत और दूसरों से अमीर बनने की इच्छा के कारण संयुक्त परिवार टूट रहे हैं | जो एक  गंभीर चिंता का विषय है | बहुत कम ही ऐसे संयुक्त परिवार दिखाई देते हैं जहां पर दो तीन पीढ़ी के सदस्य सुख पूर्वक एक साथ मिलकर रह रहे हों | परिवार टूटने के कारण रिश्तो में विश्वास की कमी आ रही है और पारस्परिक दूरियां बढ़ रहीं हैं |वर्तमान में केवल भारत में ही संयुक्त परिवार की प्रथा दिखाई देती है जो कि महान भारतीय संस्कृति की पहचान है | संयुक्त परिवार में हर सदस्य  अपने को सुरक्षित और मजबूत महसूस करता है | इसमें हर रिश्ते को यथायोग्य सम्मान मिलता है तथा हर सदस्य अनुशासित रहता है | यह सब तभी सम्भव है जब हम सहनशीलता का गुण अपनाएं |

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