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Wednesday, February 14, 2018

रोहन मोरे - भारत और तिरंगे की शान बढ़ाई विश्व कीर्तिमान बना कर

       
         रोहन मोरे ने 9 फरवरी 2018 को  सात महासागरों की चुनौती " सेवन ओशन्स चैलेंज " को सबसे कम उम्र में पार करके एक नया इतिहास बना दिया | रोहन मोरे यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय हैं | इसके साथ ही  वह यह कीर्तिमान बनाने  वाले  पहले व एकमात्र एशियाई भी बन गए | इस चुनौती में सातों महाद्वीपों के सबसे कठिन और गहरे महासागरों के रास्तों को तैरकर पार करना होता है | " सेवन ओशन्स चैलेंज " को सातों महाद्वीपों के सबसे ऊंचे पर्वत  शिखरों पर चढ़ने के समान माना जाता है | इसे तैराकी का मेराथन मानते हैं | उत्साही युवाओं के लिए ऐसे रोमांचक खेल सफलता के नए द्वार खोलते हैं |



" खेल मौजों का खतरनाक सही, क्या मैं इस खेल से डर जाऊंगा
फिर कोई लहर पुकारेगी, फिर मैं दरिया में उतर जाऊंगा | "


        जीवन परिचय :  रोहन मोरे का जन्म एक महाराष्ट्रियन परिवार में हुआ था | इनके पिता का नाम दत्तात्रेय मोरे  तथा माता का नाम विजया मोरे है | यह बचपन से ही बहुर्मुखी प्रतिभा से संपन्न थे | जब यह मात्र 4 वर्ष के थे तो एक डॉक्टर ने इनके फेफड़े कमजोर होने के कारण इनकी माता जी को रोहन को तैराकी  का अभ्यास करवाने की सलाह दी, जिससे कि फेफड़े मजबूत हो सके | इसके बाद रोहन की माता जी ने रोहन को तैराकी का प्रशिक्षण प्राप्त करवाना आरम्भ करवा दिया | यह पढ़ने लिखने में जितने होनहार थे, उतनी ही इनकी खेलों के प्रति रुचि थी | तैराकी से इन्हें विशेष लगाव था | इनकी माता विजया ने इन्हें तैराकी के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया | इनके मामा प्रह्लाद माधव सावंत ने तैराकी में इनकी  बहुत सहायता की | यह 1996 में मात्र 11 वर्ष की आयु में विश्व तैराकी  में तब सुर्खियों में आए जब इन्होंने धर्मतर से  गेटवे ऑफ इंडिया (35 किलोमीटर की दूरी मात्र 7 घंटे 29 मिनट में) तैर कर पार करते हुए कीर्तिमान बनाया |

       दसवीं कक्षा के बाद इन्होने अपना ध्यान शिक्षा पर अधिक केंद्रित करना शुरू कर दिया और तैराकी का प्रशिक्षण कम कर दिया | रोहन ने इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करके एक कंपनी में नौकरी करनी शुरू कर दी | कंपनी ने उन्हें आबू  धाबी भेज दिया | यहां पर रोहन अकेले रह रहे थे | कंपनी से आने के बाद अपना समय व्यतीत करने के लिए इन्होंने तैराकी का अभ्यास करना शुरू  कर दिया | उसने इंग्लिश चैनल को तैरकर पार करने का इरादा बनाया और जनवरी 2014 से इसके  लिए विशेष कठिन प्रशिक्षण लेना आरंभ कर दिया | मात्र कुछ महीनों की कठिन ट्रेनिंग लेने के बाद ही रोहन ने  26 जुलाई 2014 को इंग्लिश चैनल को 13 घंटे और 13 मिनट की अवधि में तैर कर पार किया | सन 2015 को इनके पिता को ब्रेन स्ट्रोक हुआ जिसके कारण उन्हें  पक्षाघात हो गया | इकलौते पुत्र होने के कारण उन्होंने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी समझते हुए, उस नौकरी से त्यागपत्र दे दिया तथा वापस भारत आ गए |

       भारत में आकर उन्होंने इंफोसिस मैं नौकरी करना शुरू कर दिया | कुछ समय के बाद उन्हें सेवन ओशन्स चैलेंज के बारे में जानकारी मिली | उन्होंने इस चुनौती को पार करने का दृढ़ निश्चय कर लिया और इसके लिए एक बार फिर विशेष कठिन प्रशिक्षण प्रारंभ कर दिया | सन 2014 से लेकर 2016 तक उन्होंने 'सेवन ओशन्स चैलेंज' के सात में से छह चुनौतियों को पार कर लिया था | अब केवल न्यूजीलैंड के उत्तर और दक्षिण द्वीप के बीच कुक स्ट्रेट को पार करना ही शेष रह गया था | रोहन मोरे ने निम्नलिखित चैनल दर्शाए गए समय में  पार किये :-
इंग्लिश चैनल     -    (13 घंटे 23 मिनट) दूरी 33.8 KM
नॉर्थ चैनल         -   (12 घंटे 43 मिनट) दूरी  34.5 KM
केटेलिना चैनल   -   (10 घंटे 17 मिनट) दूरी 32.3 KM
मोलोकई चैनल   -   (17 घंटे 28 मिनट) दूरी 42.0 KM
सुगारू स्ट्रेट        -   (10 घंटे 37 मिनट) दूरी 19.5 KM
जिब्राल्टर स्ट्रेट    -    (3 घंटे 56 मिनट) दूरी 14.4 KM

        रोहन ने 9 फरवरी 2018 को सुबह 9:30 बजे उत्तरी द्वीप से तैरना आरंभ किया | कुक स्ट्रेट की 22 किलोमीटर की दूरी 8 घंटे 37 मिनट में पार करते हुए उसे बर्फीले पानी में से गुजरना पड़ा | यह एक अत्यंत जोखिम भरा खेल है | इसमें जरा सी भी असावधानी होते हैं दुर्घटना होने की संभावना बन जाती है  | हर समय शार्क मछलियों , ज्वार भाटा और नुकीले पत्थर लगने का भय बना रहता है | अंत में रोहन ने  इस चुनौती पर भी विजय प्राप्त की, और शान से भारत का तिरंगा फहरा कर देश का गौरव बढ़ाया |
        वर्ष  2017 के राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रोहन मोरे का सम्मान करते हुए उन्हें तेनजिंग नोर्गे पुरस्कार से सम्मानित किया | यह पुरस्कार जल, थल, वायु में  रोमांचक खेलों में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त करने के लिए दिया जाता है | इंटरनेशनल मैराथन स्विमिंग हॉल ऑफ फेम (IMSHOF) ने रोहन को ” Honour Swimmer” के पुरस्कार  से पुरस्कृत किया है | उन्हें यह पुरस्कार 31 मार्च 2018 को यूनाइटेड किंगडम में दिया जाएगा | रोहन की यह असाधारण उपलब्धि भारत और हर भारतीय के लिए गर्व करने योग्य बात है |

       रोहन मोरे को इन यात्राओं के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल पाया था | सरकार को इन रोमांचक खेलों को मान्यता प्रदान करनी चाहिए | देश में ऐसे प्रतिभा संपन्न खिलाड़ियों का अभाव नहीं है | यदि उन्हें पर्याप्त प्रोत्साहन और सुविधाएं प्रदान की जाए, तो वह भी देश के लिए गौरव गाथा अवश्य लिख पाएंगे |

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