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Monday, November 26, 2018

November 26, 2018

किसी द्वारा की गई सेवा को न भूलें | Don't forget the kindness by others

एक सनकी  राजा था | वह बहुत ही निर्दयी था | वह प्रजा द्वारा की गई छोटी-छोटी गलतियों के लिए भी मौत की सजा दे देता था | उसने खूंखार शिकारी कुत्ते पाले हुए थे | वह जिसे मौत की सजा देता था उसको तत्काल  इन खूंखार जंगली शिकारी कुत्तों के आगे फेंक दिया जाता  था कुत्ते उसकी  बोटी बोटी करके खा जाते थे | एक दिन वह अपने सबसे वफादार मंत्री से भी किसी बात पर नाराज हो गया और अपनी आदत के मुताबिक उसको मौत की सजा सुना दी |

cruel indian king


मौत की सजा दिए जाने से पहले राजा ने मंत्री से उसकी आखिरी इच्छा पूछी | मंत्री ने राजा से प्रार्थना की "हे राजन मैंने आपकी पिछले  40 सालों से पूरी वफादारी के साथ सेवा की है | मै मरने से पहले आपसे केवल चार दिन का समय चाहता हूं" | राजा ने मंत्री की प्रार्थना स्वीकार कर ली और उसे चार दिन का समय दे दिया | 4 दिन के बाद मंत्री सजा पाने के लिए स्वयं ही निर्धारित स्थान पर पहुंच गया | राजा के आदेश पर सैनिकों ने मंत्री को पकड़ कर शिकारी कुत्तों के पिंजरे में फेंक दिया |



राजा और वहां पर उपस्थित अन्य लोग यह देखकर हैरान रह गए कि शिकारी कुत्तों ने मंत्री को पर हमला नहीं किया | वह खूंखार शिकारी कुत्ते मंत्री को शांति के साथ देखते रहे और पालतू कुत्ते की तरह पूंछ हिलाते रहे | राजा हैरान था कि यह शिकारी कुत्ते हैं | वैसे ही खूंखार है और इनको खास ट्रेनिंग दी हुई है | इशारा करते ही यह अपने शिकार पर झपट पड़ते है और उस को जान से मार देते हैं | कुत्तों के व्यवहार में आए बदलाव को राजा समझ नहीं पा रहा था |

       पढ़िए : एक अच्छी सोच

dogs in front of a man

राजा ने मंत्री से ही पूछा कि "यह कुत्ते आप को काटने के स्थान पर बड़े प्यार से आपके पैर क्यों  चाट रहे हैं" | मंत्री ने जवाब दिया "हे राजन  मैंने आपसे जो चार दिन का समय लिया था उसमें मैं  दिन-रात इन कुत्तों की सेवा करता रहा अपने हाथों से इन्हें  खिलाता पिलाता रहा | इतने खूंखार होने के बावजूद भी यह मेरे द्वारा इनकी चार दिन की गई सेवा को याद करके मुझ पर इतने प्रसन्न हैं कि यह मुझे काट नहीं रहे हैं | मेरा अहित नहीं कर रहें हैं | लेकिन हे राजन मैं आपकी सेवा पिछले  40 वर्ष से कर रहा हूँ लेकिन आपने  मेरी एक छोटी सी गलती पर  मेरी बरसों की स्वामिभक्ति को भुलाकर मौत की सजा सुना दी” |
यह सुनकर राजा को अपने सुनाये गए मृत्युदंड के गलत निर्णय  का एहसास हो गया | वास्तव में मंत्री ने ऐसी कोई बड़ी  गलती नहीं की थी कि उसे मृत्युदंड जैसी बड़ी सजा दी जाए | राजा ने मंत्री को आजाद करने का आदेश दे दिया और भविष्य में किसी को भी ऐसी अमानवीय सजा न देने का संकल्प किया | हम भी कई बार किसी की केवल एक छोटी सी गलती को याद करके उससे अपने रिश्ते तोड़ लेते हैं और उसकी बरसों की भलाई को भूल जाते हैं | जोश में होश नहीं खोना चाहिए बल्कि सोच समझ कर उचित निर्णय लेना चाहिए |

      पढ़िए : पिता की मनोकामना
November 26, 2018

अच्छाई का एहसास | Realisation of goodness

मनोज एक सम्पन्न परिवार का लड़का था | उसके पिता एक बड़े व्यापारी थे | उनकी गिनती शहर के रईसों में होती थी | मनोज ने इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त कर ली थी | उसकी रुचि नौकरी करने में थी | मनोज को एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी में अच्छे वेतन पर इंजीनियर की नौकरी मिल गई थी | घर में रुपए पैसे की कोई कमी नहीं थी | परिवार के सभी सदस्यों  ने यह निर्णय लिया कि मनोज की शादी किसी घरेलू कन्या से ही कर दी जाए | मनोज को भी यही उचित लग रहा था |

manoj


परिवार वालों ने शहर के एक प्रतिष्ठित परिवार की लड़की  रेनू से मनोज की शादी तय कर दी | जल्द ही उन दोनों का विवाह भी संपन्न हो गया | रेनू बहुत ही सुंदर और हंसमुख स्वभाव की लड़की थी | वह भी एक संपन्न परिवार की लड़की थी लेकिन फिर भी बहुत सादगी से रहती थी | सादगी में भी वह बहुत सुंदर और प्रभावशाली व्यक्तित्व की लड़की लगती थी | अपने अच्छे स्वभाव के कारण उसने जल्द ही परिवार के सभी सदस्यों का दिल जीत लिया | खाना बनाने में वह निपुण थी | वह रोज नए-नए और स्वादिष्ट पकवान बनाती थी | उसने घर के सारे काम की जिम्मेदारी संभाल ली थी | रेनू मनोज की हर छोटी बड़ी जरूरत का खास ख्याल रखती थी | परिवार के सभी सदस्य अपनी प्रत्येक जरूरत के लिए अब रेनू पर निर्भर करते थे |




मनोज को लगता था कि उसकी पत्नी रेनू उसके दोस्तों की पत्नियों की तरह आधुनिक नारी नहीं लगती | वह सोचता था कि रेनू घर के  जिन कामों में व्यस्त रहती है वह काम तो एक नौकरानी भी बहुत अच्छी तरह कर सकती है | वह रेनू को अपने साथ बाहर भी लेकर नहीं जाता था क्योंकि उसे रेनू को साथ लेकर जाने में शर्म महसूस होती थी | | उसका व्यवहार भी रेनू के प्रति अच्छा नहीं था | जबकि रेनू मनोज की खुशी के लिए अपने आप को बदलने की पूरी कोशिश कर रही थी | मनोज ने मन ही मन रेनू को तलाक देने का निर्णय कर लिया था | लेकिन अपने परिवार के सदस्यों को नहीं बताया था क्योंकि उसे मालूम था कि उसे सभी के विरोध का सामना करना पड़ेगा |


indian girl

       पढ़िए : एक अच्छी सोच

तभी अचानक शहर में डेंगू के बुखार का प्रकोप फ़ैल गया | मनोज भी  बुखार की चपेट में आ गया | तेज बुखार के कारण मनोज बेहोश हो गया था | जब उसको होश आया तो उसे पता चला कि रेनू सारी रात उसके सिरहाने बैठकर उसके माथे पर ठंडे पानी की पट्टियां करती रही थी | मां ने रेनू को थोड़ा आराम करने की सलाह दी लेकिन वह नहीं मानी और मनोज की देख भाल में लगी रही | रेनू की देखभाल के कारण वह तेजी से ठीक होने लगा |


 मनोज ने समय बिताने के लिए अपने  एक दोस्त को फोन किया तो पता चला कि वह दोस्त भी बीमार है लेकिन उसकी पत्नी  बाजार में शॉपिंग करने गई हुई है | दूसरे दोस्त को फोन करने पर पता चला कि वह भी तीन दिन से बीमार है लेकिन उसकी पत्नी उसे इस हाल में छोड़कर  ब्यूटी पार्लर गयी हुई है | अपने दोस्तों की पत्नियों की आधुनिकता से प्रभावित मनोज को अब अपनी पत्नी रेनू ही सबसे अच्छी  लगने लगी थी | उसे अपनी गलती का एहसास हो चुका था | मनोज ने सामने बैठी हुई रेनू को ध्यान से देखा, अब उसे रेनू की सादगी में ही सुंदरता का एहसास हो रहा था  | रेनू जैसी अच्छी जीवन साथी मिलने पर अब वह अपने आप को खुशकिस्मत महसूस कर रहा था |

Saturday, November 17, 2018

November 17, 2018

Nick Vujicic's Biography | बिना हाथों पैरों के बना विजेता

निक वुजिसिक एक अंतरराष्ट्रीय प्रेरक वक्ता (Motivational Speaker)  हैं | दोनों हाथ और पैर न होने के बावजूद भी उन्होंने जीवन में अपार सफलता प्राप्त करके एक कीर्तिमान स्थापित किया | उन्होंने अपनी विकलांगता से संघर्ष करके अपना जीवन खुशहाल बनाया तथा लाखों लोगों को अपने प्रेरणा और उत्साह भरे विचारों से खुशहाल बनने की प्रेरणा दी | निक का विचार है कि असंभव कुछ भी नहीं है | जो हम सोच सकते हैं वह हम कर भी सकते हैं |

Nick Vujicic motivational speaker


विश्व विख्यात प्रेरक वक्ता निक वुजिसिक  का जन्म 4 दिसंबर 1982 को  मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया में हुआ था | इनके  माता पिता का नाम बोरिस वुजिसिक तथा दुष्का वुजिसिक था | फोकोमेलिया  नामक बीमारी के कारण जन्म से ही इनके  दोनों हाथ और पैर नहीं थे | पैर के स्थान पर इनके कूल्हे  पर सिर्फ एक छोटा सा पंजा है जिसमें छोटी छोटी कुछ उँगलियाँ हैं | निक के माता-पिता इस विचित्र विकलांग बच्चे को देख कर निराश  हो गए | बच्चे के भविष्य की चिंता उन्हें सता रही थी | उन्होंने प्यार से उस बच्चे का पालन पोषण करना शुरू किया | निक की माता की यह  इच्छा थी की निक सामान्य बच्चों के साथ ही स्कूल में शिक्षा प्राप्त करें |



निक को सामान्य बच्चों के स्कूल में पढ़ने के लिए भेज दिया गया | निक की मां उन्हें पैर के पंजे में पेन पेंसिल फंसा कर लिखना पढ़ना सिखाने लगी | निक के पिता भी निक को पैर के पंजे से कम्प्यूटर चलाना तथा पेंटिंग करना सिखाने लगे | स्कूल के बच्चे निक की विकलांगता के कारण उसका मजाक उड़ाते थे | निक  के जीवन की राह आसान नहीं थी | लगभग 10 वर्ष की उम्र में तनाव के कारण निक ने आत्महत्या करने की भी कोशिश की |


Nick Vujicic

       पढ़िए : एक अच्छी सोच



कुछ समय के बाद अपनी मां के लिखे हुए एक लेख को पढ़ कर निक की जीवन के प्रति सोच पूरी तरह बदल गई | यह लेख निक की मां ने एक अखबार के लिए लिखा था जिसमें एक विकलांग व्यक्ति संघर्ष करके जीवन में सफल होता है | मां के लेख से प्रेरित और प्रभावित होकर निक ने भी अपनी कमियों को भूल कर अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए उत्साह और आत्मविश्वास के साथ दिन रात कोशिश करनी शुरू कर दी | 17 वर्ष की उम्र में निक ने अपना पहला लेक्चर दिया | लगभग दो साल बाद वह एक सफल प्रेरक वक्ता बन गया था |


Nick Vujicic swimming


वह अब तक लगभग 50 देशों में 40,000 से ज्यादा सेमिनार आयोजित कर चुके हैं | उनकी लोकप्रियता इस हद तक है उनके प्रेरक विचार सुनने के लिए सेमिनार हॉल पूरी तरह से भर जाते हैं | दोनों हाथ पैर न होने के बाद भी वह गोल्फ, फुटबॉल खेलते हैं और स्काईडाइविंग, ड्राइविंग भी करते हैं | यह उल्लेखनीय उपलब्धिया उनका जीवन के प्रति उत्साह दर्शाती हैं | वह अभी तक 8 पुस्तकें लिख चुके हैं | उनके द्वारा लिखी पुस्तक लाइफ विदाउट लिमिट्स 30 भाषाओं में अनुवादित होकर  बिक चुकी है | निक की असाधारण उपलब्धियों और मानवता के लिए प्रेरक सेवाओं के कारण उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है |

Friday, November 16, 2018

November 16, 2018

एक अच्छी सोच | A good thinking

शेखर अपने परिवार के साथ शहर में रहता था | उसके परिवार में पत्नी रेखा के अलावा एक बेटी और एक बेटा थे | पिछले कुछ दिनों से उनके घर में दिवाली के नाम पर विशेष सफाई अभियान चल रहा था | पत्नी रेखा घर की सफाई में विशेष रुचि ले रही थी | बच्चे भी दिवाली आने की खुशी में उत्साहित हो रहे थे | दिवाली पर खरीदी जाने वाली चीजों की सूची कई दिनों से बन रही थी |



इस सूची में बच्चों के बम पटाखे और मिठाइयों से लेकर दिवाली की संध्या के लिए लक्ष्मी पूजन की सामग्री और रिश्तेदारों को दिए जाने वाले मिठाइयां और गिफ्ट सभी को शामिल किया गया था | घर में काम करने वाले नौकरों को देने के लिए मिठाई को भी सूची में शामिल किया गया था | घर में रोशनी करने के लिए मोमबत्ती और बल्बों की लड़ी खरीदने का भी विचार किया गया था | बल्बों की लड़ियों से सजावट भी अच्छी होती है और तीन-चार दिन तक घर में रोशनी भी की जा सकती है |
दिवाली से तीन दिन पहले शेखर खरीदारी की सूची लेकर बाजार में गया था | लगभग दो घंटे से ज्यादा समय लगाकर वह सभी चीजें खरीद लाया था | रेखा खरीद कर लाई गई चीजों का सूची से मिलान करके उन्हें संभाल रही थी | मिठाईयां, पटाखे, पूजा की सामग्री, बल्बों की लड़ियां इत्यादि सब कुछ आ गया था | खरीदकर लाये गए सामान में  इनके अलावा एक बड़ा सा पॉलीथिन भी था | रेखा ने देखा उसमें ढेर सारे मिट्टी के दीपक थे | इतने सारे दीपक देखकर रेखा को पति पर  गुस्सा आ गया | उसे लगा कि शायद दीपक सस्ते मिल रहे होंगे इसलिए शेखर इतने ज्यादा दीपक खरीद लाया |

       पढ़िए : विश्वप्रसिद्ध संगीतकार बीथोवन जो कि स्वयं सुन ही नहीं सकता था

इन्हें कुछ देर के लिए पहले पानी में डालना पड़ेगा फिर इनको पानी से निकालकर सुखाना पड़ेगा फिर इसमें तेल और बाती डालने के बाद ही इन्हें जलाया जा सकता है | यह एक मेहनत और झंझट वाला काम है | रेखा ने पति से गुस्से में कहा "क्या ज्यादा दीपक जलाने से घर में ज्यादा लक्ष्मी आ जाएगी क्या" ? शेखर ने बताया कि एक गरीब बच्चा मिटटी के दीपक बेच रहा था | लेकिन उससे कोई भी दीपक खरीद नहीं रहा था | उसके स्थान पर लोग मोमबत्तियां और बल्बों की लड़ियाँ खरीद रहे थे | मैंने यह सोच कर दीपक खरीद लिए कि इन पैसों से उसके घर पर भी दिवाली मनाई जा सकेगी | उसके घर में भी दो दीपक जल सकेंगे और वह मिठाई का एक टुकड़ा खा सकेगा | यह सुनने के बाद रेखा को अपने पति के सोचने का नजरिया महान लगने लगा | वह अब बड़े प्यार से उन मिटटी के दीपकों  को संभालने लगी | इन मिट्टी के दीपकों से रेखा के घर के अलावा उस गरीब दुकानदार के घर में भी उजाला होने वाला था |

      पढ़िए : मुश्किलों से कह दो, मेरा खुदाबड़ा है
November 16, 2018

Should we follow traditions without questioning? यह प्रथा पीछे से चली आ रही है यह सोच कितनी सही कितनी गलत

एक बार सात बंदरों को एक बड़े से पिंजरे में बंद कर दिया गया |  पिंजरे के बीचो बीच में एक ऊंची सी मेज  रख दी गई | कुछ केले पिंजरे के ऊपरी भाग में इस प्रकार से बांध दिए गए की मेज पर चढ़कर बंदर यदि छलांग लगाए तो वह केलों तक आसानी से पहुंच सके |


       पढ़िए : एक अच्छी सोच

उन केलों को खाने के इरादे से एक बंदर मेज पर चढ़ गया | जैसे ही वह छलांग लगाकर केलों तक पहुंचने लगा, उस पर पिंजरे के बाहर से एक जग बहुत ठंडा पानी  गिरा दिया गया | उस बंदर के साथ-साथ बाकी बंदर भी पूरी तरह भीग गए और शांत होकर बैठ गए | थोड़ी देर के बाद एक दूसरा बंदर केले खाने के इरादे से मेज  पर चढ़ गया | जैसे ही वह छलांग मारने की कोशिश करने लगा उसके ऊपर भी पिंजरे के बाहर से एक जग बहुत ठंडा पानी गिरा दिया गया | उस बंदर के साथ-साथ बाकि सभी बंदर भी पूरी तरह से भीग गए और शांत होकर बैठ गए |

ऐसा पांच-छः बार हुआ जैसे ही कोई बंदर मेज पर चढ़कर केले खाने के इरादे से छलांग लगाने की कोशिश करने लगता तो  उस बंदर के साथ-साथ बाकी सब को भी इसकी सजा मिलती और उन पर पिंजरे के बाहर से एक जग बहुत ठंडा पानी डाल दिया जाता था | अब तक सभी बंदरों को यह अच्छी प्रकार से समझ आ गया था कि यदि कोई भी बंदर उस मेज पर चढ़कर केले खाने की कोशिश करेगा तो सजा के रूप में सभी बंदरों पर बहुत ठंडे पानी का भरा हुआ जग डाल दिया जायेगा | अब जैसे ही कोई बंदर मेज पर चढ़ने की कोशिश करता तो बाकी के सभी बंदर मिलकर उसकी पिटाई कर देते और उसे मेज के पास जाने से रोक देते थे |
कुछ देर के बाद उस बड़े पिंजरे में से  एक बंदर को बाहर निकाल दिया गया और उसके स्थान पर एक नए बंदर को पिंजरे में बंद कर दिया गया | नया बंदर पिंजरे के हालात के बारे में कुछ भी नहीं जानता था | उसने भी केले खाने के इरादे से मेज पर चढ़ने की कोशिश की तभी सारे बंदरों ने मिलकर उसकी पिटाई कर दी | जोरदार पिटाई होने के बाद नए बंदर ने केले खाने  का विचार त्याग दिया और शांत होकर बैठ गया लेकिन उसकी समझ में यह नहीं आ रहा था कि सभी बंदरों ने मिलकर उसकी इतनी जोरदार पिटाई क्यों की |

      पढ़िए : मुश्किलों से कह दो, मेरा खुदाबड़ा है


कुछ देर के बाद एक और पुराने बंदर को पिंजरे से बाहर निकाल दिया गया और उसके स्थान पर एक नए बंदर को पिंजरे में बंद कर दिया गया | यह नया बंदर भी पिंजरे के हालात को बिल्कुल नहीं जानता था | वह भी केले खाने के इरादे से मेज की तरफ जाने लगा यह देखकर सभी बंदरों ने उसकी जबरदस्त पिटाई कर दी | नए बंदर की पिटाई करने वालों में वह बंदर भी शामिल था जो कि पिछली बार आया था, जबकि उसे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि यह पिटाई किस कारण से हो रही है |
इसी प्रकार एक-एक करके सभी पुराने बंदरों को पिंजरे से बाहर निकाल दिया गया और उनके स्थान पर नए बंदरों को पिंजरे में बंद कर दिया गया | जैसे ही कोई नया बंदर पिंजरे में आता तो वह केले खाने के इरादे से मेज पर चढ़ने की कोशिश करता तो बाकि के सभी बंदर मिलकर उसकी जबरदस्त पिटाई कर देते थे | अब पिंजरे में बंद सातों बंदर नए थे | उनमें से किसी को भी इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि केले खाने के इरादे से मेज के पास जाने पर पिटाई क्यों होती है |  उनके ऊपर एक बार भी ठंडा पानी नहीं डाला था लेकिन  मेज के पास जाने के कारण उनकी अपने बाकी के साथियों द्वारा पिटाई हो चुकी थी |

      पढ़िए : बेटा भाग्य है तो बेटी सौभाग्य है 

अब एक और नए बंदर को पिंजरे में बंद कर दिया गया और हैरानी की बात देखिये यह नया बंदर भी केले खाने के इरादे से मेज  के पास जाने लगा तो बाकी सभी बंदरों ने मिलकर उसकी जमकर पिटाई कर दी | जब की पिटाई करने वाले सभी बंदरों  को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि वह इस बंदर की पिटाई क्यों कर रहे हैं |

यह प्रथा पीछे से चली आ रही है यह सोचकर हम  पुरानी प्रथाओं और रीति रिवाजों का  आँख मूंदकर  पालन करते रहते हैं | यह आज के परिपेक्ष्य में उचित है या नहीं इस पर  विचार करके हम नया कदम उठाने का साहस ही नहीं जुटा पाते | कोई बात यदि किसी विशेष परिस्थिति में उचित रही हो तो यह जरूरी नहीं कि वह हमेशा ही बदलती परिस्थितियों में  उचित रहे |

      पढ़िए : मासूम की पुकार 

Sunday, November 11, 2018

November 11, 2018

Beethoven's biography in Hindi | विश्व प्रसिद्ध संगीतकार बीथोवन जो कि स्वयं सुन ही नहीं सकता था

बीथोवन को बचपन से ही संगीत में गहरी रुचि थी | वह  पियानो बहुत अच्छा बजाते थे | जब वह पियानो बजाते थे तो उनकी मधुर धुन को सुनकर आने जाने वाले लोग रुक कर बड़े ध्यान से सुनते थे | उनके पिता नशा करने के आदी थे | वह अपने पुत्र के संगीत के जरिए पैसा कमाना चाहते थे जिससे की वह अपना नशा करने का शौक पूरा कर सकें |

Beethoven biography


बीथोवन की मां एक अच्छे स्वभाव की स्त्री थी | वह अपने पुत्र से बहुत प्रेम और स्नेह करती थी | उसका संगीत का शौक पूरा करने के लिए मदद करती थी | जब बीथोवन मात्र 17 वर्ष की आयु के थे तभी उनकी माता का आकस्मिक निधन हो गया | महान संगीतकार मोजार्ट और हेडन  से बीथोवन ने संगीत की शिक्षा ली | बीथोवन अक्खड़ स्वभाव के बन गए थे |

Beethoven childhood photograph


जब वह 30 वर्ष की आयु के हुए तब उन्हें कानों से सुनने में कुछ परेशानी महसूस होने लगी | उन्होंने कई डॉक्टरों से अपने कानों का उपचार करवाया लेकिन उनके सुनने की शक्ति धीरे-धीरे कम होती चली गई और अंत में वह बहरे हो गए | एक संगीतकार के लिए इससे दुखद स्थिति क्या हो सकती थी | उन्होंने इस स्थिति को चुनौती के तौर पर स्वीकार किया |  इस बहरेपन ने उसके जीवन को ही बदल दिया | उन्होंने कई ऐसी शानदार और कर्णप्रिय संगीत की धुनों की रचना की जो कि हमेशा के लिए अमर हो गई | जबकि वह स्वयं इन धुनों को सुनने में असमर्थ थे |

      पढ़िए :  प्यार अमर है अमर ही रहेगा | Perfect love story of a blind

बीथोवन संगीत के कार्यक्रम प्रस्तुत करते रहते थे, जिन्हें की श्रोताओं द्वारा सराहा  जाता था | ऐसे ही एक दिन वह संगीत का एक कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे थे | वह अपने साथी कलाकारों को संगीत का निर्देशन कर रहे थे इसलिए दर्शकों की ओर उनकी पीठ थी | दर्शक उनके बेहतरीन संगीत की धुनों पर झूम रहे थे | कार्यक्रम समाप्त होने पर बीथोवन अपना सामान इकट्ठा करने लगे | अभी भी दर्शकों की ओर उनकी पीठ ही थी | तभी उनके एक  साथी कलाकार ने उनका चेहरा दर्शकों की ओर घुमा दिया | दर्शक बीथोवन के सम्मान में खड़े होकर तालियां बजा रहे थे | जब दर्शकों को इस बात का ज्ञान हुआ कि बीथोवन न तो अपनी बनाई धुनों को सुन सकते हैं और न ही उनके सम्मान में बजाई गई तालियों को तो उनकी आंखें भर आई | इस संगीतकार की महानता के सामने दर्शक नतमस्तक हो गए | साहित्य में जितना सर्वोच्च स्थान शेक्सपियर का है पश्चिमी संगीत में  उतना ही सर्वोच्च स्थान बीथोवन का है |

      पढ़िए : बेटा भाग्य है तो बेटी सौभाग्य है 
November 11, 2018

पिता की मनोकामना | Wishes by father

एक बार एक पिता और पुत्र समुद्र में अपनी मोटर बोट से यात्रा कर रहे थे | तभी अचानक तूफान आ गया | तेज हवाओं और ऊंची-ऊंची लहरों के कारण वह रास्ता भटक गए | तूफान के कारण उनकी मोटर बोट भी किसी बड़े पत्थर से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गई थी और उसमें छेद हो गया था | उससे मोटर बोट में पानी भरने लगा था उसका डूबना निश्चित सा था |

father and son on boat


तभी उन्हें दूर एक टापू दिखाई दिया | वह टापू की ओर अपनी मोटर बोट को ले गए | टापू पर पहुंचकर वह मोटर बोट से उतर गए | कुछ पलों में ही मोटरबोट पानी में डूब गई | कुछ देर के बाद तूफान थम गया | पिता पुत्र ने देखा कि यह एक बिल्कुल सुनसान टापू था | यहाँ पर दूर-दूर तक केवल रेत ही रेत थी | यहां रहने और खाने के लिए कुछ भी नहीं था | टापू पर भटकते-भटकते पिता और पुत्र भूख और प्यास से बेहाल हो गए थे | पुत्र ने पिता से कहा यहां पर खाने पीने को कुछ भी नहीं है अब हमारा मरना निश्चित है |


पिता ने पुत्र को समझाया कि भगवान हमारी रक्षा अवश्य करेंगे तभी उन्होंने हमें डूबने से बचाकर इस सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है | पिता ने पुत्र को भगवान से प्रार्थना करने के लिए कहा | पुत्र को पिता की सलाह उचित लगी | पिता और पुत्र दोनों थोड़ी दूरी पर अलग-अलग बैठकर भगवान से प्रार्थना करने लगे | पुत्र ने भगवान से प्रार्थना की "हे प्रभु इस टापू पर फल और सब्जियां आ जाए जिसे खाकर अपनी भूख मिटा सके" | भगवान ने पुत्र की प्रार्थना स्वीकार कर ली | अगले ही पल वहां पर फल और सब्जियां प्रकट हो गई | पिता और पुत्र को खाना बनाना नहीं आता था | इसलिए पुत्र ने एक बार फिर भगवान से प्रार्थना की कि खाना बनाने के लिए एक सुंदर स्त्री भी आ जाए तो वह खाना भी बना देगी उसके साथ मैं अपना परिवार बनाकर रह भी सकूंगा | अगले ही पल एक सुंदर स्त्री प्रकट हो गई |


girl on boat


उस सुंदर स्त्री ने खाना बनाया और पिता-पुत्र ने भरपेट खाना खाया | पिता ने पुत्र को सलाह दी कि तुम्हारी सभी प्रार्थनाएं भगवान द्वारा स्वीकार हो रही है | तुम यहां से निकलने के लिए  भगवान से एक नाव भिजवाने के लिए प्रार्थना करो | पुत्र ने भगवान से नाव भेजने के लिए प्रार्थना की | भगवान ने पुत्र की प्रार्थना स्वीकार करते हुए अगले ही पल नाव प्रकट कर दी | यह एक छोटी सी नाव थी जिसमें केवल दो लोग ही बैठ सकते थे |


boat on which only two person and sit

      पढ़िए : मासूम की पुकार 

पुत्र सुंदर स्त्री के सौंदर्य से प्रभावित होकर उस पर मोहित हो चुका था | पुत्र उस सुंदर स्त्री के साथ नाव की ओर जाने लगा | पिता ने पुत्र से कहा कि मुझको साथ नहीं लेकर जाओगे | पुत्र ने उत्तर दिया की “भगवान ने आपकी तो एक भी प्रार्थना स्वीकार नहीं की | ऐसा लगता है कि भगवान आपकी रक्षा नहीं करना चाहते"| तभी एक आकाशवाणी हुई "बेटा तुम्हारे लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि तुम्हारे पिता ने क्या प्रार्थना की” | तुम्हारे पिता केवल एक ही प्रार्थना करते रहे कि "हे भगवान मेरे पुत्र की हर मनोकामना को पूरी करना | तुम्हारे पिता की प्रार्थना के प्रभाव के कारण ही तुम्हारी हर प्रार्थना स्वीकार हुई है" | पुत्र ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पिता से क्षमा मांगी और वह दोनों नाव में बैठकर अपने घर की ओर चल दिए | सभी बच्चों को अपने माता पिता की प्यार और स्नेह भरी  भावनाओं को समझना चाहिए |